Search
Close this search box.

प्रशासनिक न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह ने मुरादाबाद जिला न्यायालय का किया निरीक्षण, बार एसोसिएशन ने नए न्यायालयों की स्थापना सहित कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं

प्रशासनिक न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह ने मुरादाबाद जिला न्यायालय का किया निरीक्षण, बार एसोसिएशन ने नए न्यायालयों की स्थापना सहित कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं

मुरादाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश एवं मुरादाबाद जनपद के प्रशासनिक न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह ने शनिवार को मुरादाबाद जिला न्यायालय का विस्तृत निरीक्षण किया। उनके आगमन पर जिला न्यायाधीश, विभिन्न न्यायिक अधिकारियों, दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद के पदाधिकारियों, शासकीय अधिवक्ताओं तथा बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने उनका गरिमापूर्ण स्वागत किया। न्यायालय परिसर में पूरे दिन न्यायिक गतिविधियों के साथ अनुशासित एवं सकारात्मक वातावरण बना रहा। इस निरीक्षण को जनपद की न्यायिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें न्यायिक कार्यप्रणाली, आधारभूत संरचना तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।

नई दिल्ली में आयोजित विश्वमांगल्य सभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर मंथन, सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का प्रेरक संबोधन


न्यायालय की व्यवस्थाओं का लिया विस्तृत जायजा

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह ने न्यायालय परिसर की विभिन्न व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न न्यायालयों की कार्यप्रणाली, लंबित वादों के निस्तारण की गति, न्यायालय भवनों की आधारभूत सुविधाओं, अभिलेखों के रखरखाव, डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली, स्वच्छता व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध तथा न्यायालय आने वाले वादकारियों एवं अधिवक्ताओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन किया।

उन्होंने अधिकारियों से न्यायालयों में लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति, उनके त्वरित निस्तारण की रणनीति तथा न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीकी संसाधनों के अधिकतम उपयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ न्यायपालिका आम नागरिकों के लिए न्याय प्राप्ति का प्रथम माध्यम है, इसलिए उसकी कार्यप्रणाली पारदर्शी, उत्तरदायी एवं समयबद्ध होनी चाहिए।


जिला न्यायाधीश एवं न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक

निरीक्षण के उपरांत जिला न्यायाधीश के चैंबर में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला न्यायाधीश सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों ने न्यायालयों के समक्ष मौजूद चुनौतियों, लंबित मुकदमों के निस्तारण, आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता तथा न्यायिक प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

बार एसोसिएशन चुनाव पर गहराया असमंजस: एल्डर्स कमेटी के फैसले पर उठे सवाल, अध्यक्ष बोले—बार काउंसिल को पहले ही भेजी जा चुकी है सूचना

प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि न्यायिक प्रक्रिया में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग, ई-कोर्ट प्रणाली को और मजबूत करने तथा न्यायालयों में बेहतर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया।


बार एसोसिएशन ने रखीं न्यायिक सुविधाओं के विस्तार की महत्वपूर्ण मांगें

निरीक्षण के बाद दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता एवं महासचिव कपिल गुप्ता के नेतृत्व में प्रशासनिक न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया तथा जनपद की न्यायिक आवश्यकताओं से अवगत कराया।

विदेशी ताकतों और स्वार्थ की राजनीति से सावधान रहें युवा, राष्ट्रहित को रखें सर्वोपरि

बार एसोसिएशन ने कहा कि मुरादाबाद जनपद में लगातार मुकदमों एवं वादकारियों की संख्या बढ़ रही है, जिसके कारण न्यायालयों पर कार्यभार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने के लिए नए न्यायालयों की स्थापना समय की आवश्यकता बन गई है।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति के समक्ष आर्थिक अपराध न्यायालय (Economic Offences Court), विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special CJM), ऋण वसूली न्यायाधिकरण (Debt Recovery Tribunal-DRT) तथा जीएसटी न्यायालय (GST Court) की स्थापना की मांग प्रमुखता से रखी। उनका कहना था कि इन न्यायालयों की स्थापना से विशेष प्रकार के मामलों का त्वरित निस्तारण संभव होगा, न्यायालयों पर बढ़ते कार्यभार में कमी आएगी तथा आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय प्राप्त होगा।


अधिवक्ताओं की सुविधाओं पर भी दिया गया विशेष जोर

बार अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति को अवगत कराया कि अधिवक्ताओं एवं वादकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए न्यायालय परिसर में आधारभूत सुविधाओं का और विस्तार आवश्यक है। उन्होंने अधिवक्ताओं के बैठने की समुचित व्यवस्था, पर्याप्त चैंबर, आधुनिक सुविधाओं से युक्त बार कक्ष, स्वच्छ पेयजल, बेहतर पार्किंग व्यवस्था तथा न्यायालय परिसर में आवश्यक नागरिक सुविधाओं के विकास की मांग रखी।

इसके अतिरिक्त न्यायालयों एवं संबंधित कार्यालयों को एक-दूसरे के निकट स्थापित किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, जिससे न्यायिक कार्यों में अनावश्यक विलंब कम हो और वादकारियों को विभिन्न कार्यालयों के बीच बार-बार आवागमन न करना पड़े।


शासकीय अधिवक्ताओं ने भी किया सम्मान

जिला शासकीय अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने भी प्रशासनिक न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। प्रतिनिधिमंडल में डीजीसी (क्रिमिनल) नितिन गुप्ता, डीजीसी (सिविल) अजय गुप्ता, एडीजीसी संजीव अग्रवाल, ब्रजराज सिंह, अशोक यादव, आनंद पाल सिंह, दक्ष अग्रवाल, शुएब एडवोकेट सहित अनेक शासकीय अधिवक्ता उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने तथा न्यायालयों में बेहतर समन्वय स्थापित करने के संबंध में भी अपने सुझाव प्रशासनिक न्यायमूर्ति के समक्ष रखे।


न्यायपालिका और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय पर दिया विशेष बल

दौरे के दौरान प्रशासनिक न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह ने न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं से संवाद करते हुए कहा कि न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय न्याय व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच बेहतर समन्वय, पारस्परिक सम्मान एवं सहयोग से ही न्यायिक व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनविश्वसनीय बन सकती है।

उन्होंने कहा कि न्याय केवल समय पर होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी पारदर्शी, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने अधीनस्थ न्यायपालिका से अपेक्षा व्यक्त की कि प्रत्येक वादकारी को न्यायालय से सकारात्मक अनुभव प्राप्त हो तथा न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब को न्यूनतम किया जाए।


जनपद की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहा दौरा

मुरादाबाद में प्रशासनिक न्यायमूर्ति चन्द्रधारी सिंह का यह निरीक्षण न्यायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान न्यायालयों की वर्तमान स्थिति, आधारभूत आवश्यकताओं तथा भविष्य की न्यायिक चुनौतियों पर गंभीरता से विचार किया गया। बार एसोसिएशन एवं शासकीय अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत सुझावों और मांगों को भी प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने गंभीरता से सुना।

अधिवक्ता समुदाय को आशा है कि जनपद में नए न्यायालयों की स्थापना, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा न्यायिक संसाधनों को सुदृढ़ करने संबंधी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। यदि इन प्रस्तावों पर अमल होता है तो इससे न्यायालयों पर बढ़ते कार्यभार में कमी आएगी, लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण को गति मिलेगी तथा आम नागरिकों को अधिक सुलभ, प्रभावी और समयबद्ध न्याय उपलब्ध हो सकेगा।

Leave a Comment