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महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन, छात्र-छात्राओं ने लिया स्वदेशी अपनाने का संकल्प

महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन, छात्र-छात्राओं ने लिया स्वदेशी अपनाने का संकल्प

रिपोर्ट: रुद्र प्रताप सिंह

मुरादाबाद। देश की आर्थिक मजबूती केवल बड़े उद्योगों, कंपनियों और बड़े कारोबार से नहीं होती, बल्कि उस सोच से भी होती है जो समाज के युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार के अवसर पैदा करने तथा स्थानीय उत्पादों और उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करती है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए मुरादाबाद के महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन का आयोजन किया गया।

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सम्मेलन में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को उद्यमिता, स्वदेशी, स्थानीय उत्पादन, आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से कहा कि आज का युवा केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि भविष्य में नए रोजगार पैदा करने वाला भी बन सकता है।

कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं ने स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देने और स्वदेशी की भावना को अपने परिवार एवं समाज तक पहुंचाने का संकल्प लिया। सम्मेलन के आयोजन में विद्यालय की प्रधानाचार्या स्मिता सक्सैना सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं स्टाफ का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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भारत की समृद्ध विरासत से मिली उद्यमिता की प्रेरणा

कार्यक्रम में मेजर राजीव ढल ने भारत के गौरवशाली अतीत, आर्थिक समृद्धि और पारंपरिक उद्यमशीलता पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने भारत की उस ऐतिहासिक पहचान का उल्लेख किया, जिसके कारण देश को लंबे समय तक “सोने की चिड़िया” के रूप में जाना जाता रहा।

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि भारत की आर्थिक समृद्धि के पीछे केवल प्राकृतिक संसाधन ही नहीं, बल्कि यहां की मजबूत कृषि व्यवस्था, हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, वस्त्र निर्माण, धातु-कला, व्यापारिक परंपराएं और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित स्थानीय कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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मेजर राजीव ढल ने कहा कि भारत में सदियों से लोग अपने स्थानीय संसाधनों और कौशल के आधार पर उत्पादन तथा व्यापार करते रहे हैं। उस समय भी अनेक परिवार और समुदाय अपने पारंपरिक हुनर को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते थे। उन्होंने विद्यार्थियों को इस विरासत से प्रेरणा लेकर आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के माध्यम से नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि यदि देश की युवा पीढ़ी अपनी प्रतिभा और कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नए उत्पाद और सेवाएं विकसित करे तो भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।

उद्यमिता केवल व्यापार नहीं, रोजगार सृजन का माध्यम

डॉ. ए.के. अग्रवाल, प्रांत समन्वयक ने विद्यार्थियों को उद्यमिता के व्यापक अर्थ से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि उद्यमिता का मतलब केवल दुकान, फैक्ट्री या कोई पारंपरिक व्यवसाय शुरू करना नहीं है। अपनी प्रतिभा, ज्ञान, कौशल और नए विचारों का उपयोग करके किसी समस्या का समाधान तैयार करना और उसे उपयोगी उत्पाद या सेवा में बदलना भी उद्यमिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा पूरी करने के बाद प्रत्येक युवा के सामने केवल नौकरी प्राप्त करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए। यदि किसी विद्यार्थी के भीतर कोई विशेष प्रतिभा, हुनर या नया विचार है तो वह उसे व्यवस्थित तरीके से विकसित करके भविष्य में उद्यम का रूप दे सकता है।

उन्होंने कहा कि एक सफल उद्यमी केवल अपने लिए आय का साधन नहीं बनाता, बल्कि समय के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करता है। इस दृष्टि से उद्यमिता आत्मनिर्भरता के साथ-साथ रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

डॉ. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि किसी उत्पाद को खरीदने का निर्णय भी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। जब उपभोक्ता स्थानीय और भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देता है तो उसका लाभ छोटे निर्माता, कारीगर, व्यापारी, किसान और स्थानीय उद्यमियों तक पहुंचता है।

छात्र-छात्राओं ने ली स्वदेशी की शपथ

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण उस समय रहा जब डॉ. ए.के. अग्रवाल ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को स्वदेशी की शपथ ग्रहण कराई। विद्यार्थियों ने देश में निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देने तथा स्वदेशी भावना को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

विद्यार्थियों ने यह भी संकल्प लिया कि वे स्वदेशी के महत्व के बारे में अपने परिवार और आसपास के लोगों को जागरूक करेंगे। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि स्वदेशी का उद्देश्य किसी अन्य देश या व्यक्ति के प्रति विरोध की भावना उत्पन्न करना नहीं है, बल्कि भारतीय उत्पादन, स्थानीय उद्योग, रोजगार और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि स्वदेशी केवल किसी वस्तु को खरीदने का विषय नहीं है। यह एक व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण है, जिसमें उत्पादन, उपभोग, रोजगार, स्थानीय बाजार और देश की आर्थिक मजबूती एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।

स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर

सम्मेलन में स्थानीय उत्पादों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं को खरीदने से स्थानीय बाजार में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।

एक छोटे व्यापारी से खरीदारी करने पर उसका कारोबार आगे बढ़ता है और उसके माध्यम से जुड़े अन्य लोगों को भी काम मिलता है। इसी प्रकार स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को बाजार मिलने पर उनकी पारंपरिक कला और कौशल को भी संरक्षण मिलता है।

विद्यार्थियों को समझाया गया कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का निर्माण केवल बड़े कारखानों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे व्यवसायों, कुटीर उद्योगों, स्थानीय उत्पादकों और युवा उद्यमियों को मजबूत करने से भी होता है।

स्वदेशी से मजबूत होती है स्थानीय अर्थव्यवस्था

स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक नीरज सोलंकी एडवोकेट ने स्वदेशी विषय पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को केवल किसी वस्तु की खरीद तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह ऐसी आर्थिक सोच है जिसमें देश के उत्पादक, किसान, कारीगर, व्यापारी, युवा उद्यमी और उपभोक्ता एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को उदाहरण के माध्यम से समझाया कि जब कोई व्यक्ति स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तु खरीदता है तो उस खरीद से प्राप्त आय स्थानीय बाजार में कई स्तरों पर घूमती है। इससे छोटे व्यवसायों को काम मिलता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी कल के केवल उपभोक्ता नहीं होंगे, बल्कि वे निर्माता, उद्यमी, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और रोजगारदाता भी बन सकते हैं। इसलिए विद्यार्थियों में प्रारंभ से ही आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता विकसित करना आवश्यक है।

नीरज सोलंकी ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वदेशी को केवल कार्यक्रम में ली गई शपथ तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी रोजमर्रा की खरीदारी और जीवनशैली में व्यवहारिक रूप से अपनाने का प्रयास करें।

महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण

कार्यक्रम का संचालन महानगर महिला संयोजक नीलम जैन ने किया। उन्होंने कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाते हुए विद्यार्थियों के समक्ष स्वदेशी और उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाएं शिक्षा, व्यापार, तकनीक, सेवा क्षेत्र और विभिन्न प्रकार के उद्यमों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। महिलाओं और युवतियों को यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, वित्तीय जानकारी और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे छोटे स्तर से शुरुआत करके सफल उद्यम खड़े कर सकती हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास मौजूद स्थानीय प्रतिभाओं और उत्पादों को पहचानने तथा उन्हें प्रोत्साहित करने की दिशा में सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उद्यमिता का विकास तभी व्यापक रूप ले सकता है जब समाज के प्रत्येक वर्ग को इसमें भागीदारी का अवसर मिले।

शिक्षा के साथ राष्ट्र निर्माण की भावना जरूरी

विद्यालय की प्रधानाचार्या स्मिता सक्सैना ने स्वदेशी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान देने का स्थान नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और विचारों के निर्माण की भी महत्वपूर्ण संस्था है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में देश के प्रति जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता, अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक सोच विकसित करना शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। यदि विद्यार्थी छोटी उम्र से ही यह समझने लगें कि उनके निर्णयों का समाज और देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ता है तो उनमें जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना और मजबूत होगी।

प्रधानाचार्या ने उद्यमिता और स्वदेशी जैसे विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने को विद्यार्थियों के भविष्य के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर ऐसे विषयों पर चर्चा होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य के अवसरों को समझने में भी मदद मिलती है।

विद्यार्थियों में दिखा उत्साह

सम्मेलन के दौरान छात्र-छात्राओं ने वक्ताओं को गंभीरता से सुना और स्वदेशी तथा उद्यमिता से जुड़े विषयों को समझने में रुचि दिखाई। विद्यार्थियों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता रही कि वे भविष्य में अपने कौशल और रुचि के आधार पर किस प्रकार नए अवसरों का निर्माण कर सकते हैं।

कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण केवल सरकार या बड़े उद्योगों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवा वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है।

युवाओं में यदि शुरुआत से ही स्थानीय उत्पादों के प्रति जागरूकता, नए विचारों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और रोजगार सृजन की भावना विकसित की जाए तो आने वाले समय में इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

स्थानीय हुनर को बाजार से जोड़ना समय की जरूरत

कार्यक्रम में यह विचार भी सामने आया कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में कारीगर, छोटे उत्पादक और पारंपरिक हुनर रखने वाले लोग मौजूद हैं। आवश्यकता इस बात की है कि उनके उत्पादों को आधुनिक बाजार, तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए।

विद्यार्थी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने, नए बाजार तलाशने और छोटे उद्यमियों को आधुनिक तरीकों से जोड़ने में भविष्य में योगदान दे सकते हैं।

इससे एक ओर जहां पारंपरिक कौशल को संरक्षण मिलेगा, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए नए रोजगार और व्यवसाय के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

आत्मनिर्भरता की दिशा में छोटे कदम भी महत्वपूर्ण

सम्मेलन का समापन विद्यार्थियों द्वारा स्वदेशी की भावना को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ। विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं स्टाफ ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन ने विद्यार्थियों के सामने एक महत्वपूर्ण विचार रखा कि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की शुरुआत हमेशा बड़े स्तर से ही हो, यह जरूरी नहीं है।

किसी स्थानीय उत्पाद को प्राथमिकता देना, किसी छोटे उद्यमी का सामान खरीदना, किसी कारीगर के हुनर को प्रोत्साहित करना, अपने कौशल को व्यवसाय में बदलने की दिशा में प्रयास करना और भविष्य में दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना भी राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि स्वदेशी केवल एक विचार या शपथ नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार नागरिकता की दिशा में अपनाई जाने वाली व्यवहारिक सोच भी हो सकती है।

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