मुरादाबाद की नई कमान संभालते ही एक्शन में आए डीएम अनुनय झा, कलेक्ट्रेट में औचक निरीक्षण से दिया स्पष्ट संदेश
जनसुविधा, पारदर्शी प्रशासन और जनसंवाद को बताया प्राथमिकता; बोले- तथ्यात्मक आलोचना का हमेशा स्वागत, हर महीने मीडिया के साथ होगी समीक्षा बैठक
मुरादाबाद। मुरादाबाद के नवनियुक्त जिलाधिकारी अनुनय झा (IAS 2015 बैच) ने विधिवत जिले की कमान संभाल ली है। कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर का निरीक्षण कर विभिन्न पटलों, कार्यालयों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से लंबित मामलों, जनशिकायतों और कार्यालयों में चल रहे कार्यों की जानकारी ली।
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डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आम जनता को सरकारी कामकाज के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। जनशिकायतों और लंबित प्रकरणों का निर्धारित समयसीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कार्यालयों में साफ-सफाई, अभिलेखों के रखरखाव और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देने की बात कही।
कार्यभार संभालने के बाद कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों के साथ संवाद के दौरान जिलाधिकारी ने अपनी प्रशासनिक कार्यशैली और मुरादाबाद को लेकर प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि जनसुविधा, पारदर्शिता, विकास कार्यों की गति और मजबूत जनसंवाद उनके लिए महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।
कलेक्ट्रेट पहुंचते ही लिया व्यवस्थाओं का जायजा
जिलाधिकारी का पदभार ग्रहण करने के बाद अनुनय झा ने औपचारिकताओं तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर के विभिन्न पटलों और कार्यालयों का निरीक्षण किया तथा वहां की वास्तविक स्थिति को करीब से समझने का प्रयास किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से विभिन्न विभागों में लंबित प्रकरणों, जनशिकायतों और कार्यालयीन कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कार्यालय आम नागरिकों के लिए सुविधा का माध्यम होने चाहिए। लोगों को एक छोटे से काम के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें अपने प्रकरण की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए। इसके लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और नियमित समीक्षा जरूरी है।
बिहार के रहने वाले, दिल्ली में हुई स्कूली शिक्षा
पत्रकार वार्ता के दौरान डीएम अनुनय झा ने अपने व्यक्तिगत और प्रशासनिक सफर के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं, जबकि उनकी स्कूली शिक्षा दिल्ली में हुई।
इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की।
उन्होंने बताया कि सिविल सेवा के पहले प्रयास में उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में हुआ था। इसके बाद दूसरे प्रयास में वर्ष 2015 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयन हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला।
सिविल सेवा में आने के बाद उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं और विभिन्न प्रकार की सामाजिक, आर्थिक तथा प्रशासनिक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव हासिल किया।
मुरादाबाद से रहा है पुराना प्रशासनिक रिश्ता
नवनियुक्त जिलाधिकारी के लिए मुरादाबाद पूरी तरह नया जिला नहीं है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि करीब दस वर्ष पहले वह मुरादाबाद में प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
ऐसे में अब जिलाधिकारी के रूप में मुरादाबाद की जिम्मेदारी संभालना उनके प्रशासनिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा सकता है। प्रशिक्षु अधिकारी के तौर पर जिले को देखने के बाद अब जिलाधिकारी के रूप में उन्हें पूरे जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी मिली है।
मुरादाबाद एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और व्यावसायिक जिला होने के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख शहर भी है। ऐसे में यहां प्रशासन के सामने शहरी व्यवस्थाओं के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को भी समान रूप से देखने की चुनौती रहती है।
झांसी से अलीगढ़ और मथुरा तक संभाली अहम जिम्मेदारियां
IAS सेवा में आने के बाद अनुनय झा ने प्रदेश के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण प्रशासनिक संस्थानों में जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने झांसी में एसडीएम सदर के रूप में कार्य किया। इसके बाद अलीगढ़ में करीब 25 महीने तक मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की जिम्मेदारी संभाली।
इसके बाद उनका कार्यक्षेत्र मथुरा-वृंदावन नगर निगम रहा, जहां उन्होंने करीब दो वर्ष सात महीने तक नगर आयुक्त के रूप में काम किया।
नगर निकाय में काम करने के दौरान उन्हें शहरी विकास, सफाई व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं, नगर नियोजन और स्थानीय प्रशासन से जुड़े विभिन्न विषयों पर काम करने का अनुभव मिला।
इसके बाद जिलाधिकारी के रूप में उनकी तैनाती महराजगंज में हुई और बाद में उन्होंने हरदोई की जिम्मेदारी संभाली। अब मुरादाबाद उनकी जिलाधिकारी के रूप में तीसरी तैनाती है।
महराजगंज और हरदोई में भी रहा लंबा प्रशासनिक अनुभव
मुरादाबाद से पहले अनुनय झा महराजगंज के जिलाधिकारी रहे। नेपाल सीमा से सटे इस महत्वपूर्ण तराई जनपद में उन्होंने करीब एक वर्ष सात माह तक जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया।
महराजगंज में उनके कार्यकाल के दौरान वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव भी संपन्न हुए। सीमावर्ती जिले में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था, चुनाव प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम करने का अवसर मिला।
इसके बाद उन्हें हरदोई का जिलाधिकारी बनाया गया, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष चार महीने तक प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली। हरदोई में उनके कार्यकाल के दौरान गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी आयोजित हुए।
इस तरह मुरादाबाद की जिम्मेदारी संभालने से पहले उन्हें प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का व्यापक अनुभव मिल चुका है।
मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जताया भरोसा
पत्रकारों से बातचीत के दौरान डीएम अनुनय झा ने मीडिया की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता में विश्वास रखते हैं।
उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि किसी भी खबर को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले संबंधित प्रशासनिक पक्ष को भी शामिल किया जाए। उनके मुताबिक इससे खबर की विश्वसनीयता और प्रमाणिकता बढ़ती है तथा किसी विषय की पूरी तस्वीर सामने आती है।
डीएम ने कहा कि प्रशासन और मीडिया के बीच नियमित संवाद रहने से जनता से जुड़े मुद्दों को बेहतर तरीके से सामने लाया जा सकता है। प्रशासन को भी यह समझने में मदद मिलती है कि आम लोगों से जुड़े कौन से विषय प्राथमिकता में हैं।
हर महीने मीडिया के साथ समीक्षा बैठक का प्रस्ताव
डीएम ने पत्रकारों के साथ संवाद को नियमित बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की बात कही। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि हर महीने मीडिया के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की जाए।
इस बैठक में जिले की प्रमुख समस्याओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों की प्रगति पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं के लिए अलग-अलग समयसीमा निर्धारित कर समीक्षा करने की बात कही।
उनके अनुसार करीब छह महीने में पूरे किए जा सकने वाले मुद्दों और एक वर्ष की अवधि वाले दीर्घकालिक विकास कार्यों की प्रगति का नियमित आकलन किया जाना चाहिए।
ऐसी समीक्षा व्यवस्था से प्रशासनिक अधिकारियों के सामने तय लक्ष्यों और उनकी प्रगति की नियमित तस्वीर सामने रह सकती है। साथ ही मीडिया के माध्यम से जनता तक भी विकास कार्यों की स्थिति और प्रशासन की प्राथमिकताओं की जानकारी पहुंच सकती है।
‘स्ट्रेट टॉकर’ हैं डीएम अनुनय झा
अपनी कार्यशैली के सवाल पर जिलाधिकारी ने खुद को स्पष्टवादी यानी ‘स्ट्रेट टॉकर’ बताया। उन्होंने कहा कि वह बात को घुमाने के बजाय सीधे और स्पष्ट तरीके से रखने में विश्वास करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि तथ्यात्मक आलोचना का वह स्वागत करते हैं, क्योंकि सही तथ्यों के आधार पर की गई आलोचना प्रशासन को अपनी कमियों को समझने और सुधार करने में मदद कर सकती है।
हालांकि उन्होंने व्यक्तिगत आलोचना और तथ्यात्मक आलोचना के बीच अंतर की बात भी कही। उनके अनुसार प्रशासनिक कामकाज पर तथ्यों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर सवाल उठाए जाने से व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
डीएम की इस बात को मीडिया संवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे प्रशासन और पत्रकारों के बीच नियमित संवाद की भूमिका को लेकर उनका दृष्टिकोण सामने आया है।
कोविड और बाढ़ प्रबंधन को बताया चुनौतीपूर्ण अनुभव
अपने प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए डीएम अनुनय झा ने उन परिस्थितियों का भी जिक्र किया जिन्हें उन्होंने अपने सेवाकाल की प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया।
उन्होंने बताया कि अलीगढ़ में सीडीओ के रूप में कार्य करते हुए कोविड-19 महामारी के दौरान घनी आबादी वाले क्षेत्रों का प्रबंधन काफी चुनौतीपूर्ण रहा।
कोविड के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था, लोगों की आवाजाही, संक्रमण नियंत्रण और प्रशासनिक संसाधनों के समन्वय जैसे विषयों पर लगातार काम करना पड़ा।
इसके अलावा पिछले करीब पांच वर्षों के दौरान मथुरा, महराजगंज और हरदोई में बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटना भी उनके लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक अनुभव रहा।
बाढ़ और अन्य आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावित लोगों तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारियां होती हैं।
टीमवर्क और जनसहयोग से विकास को गति देने का भरोसा
मुरादाबाद की नई जिम्मेदारी को लेकर जिलाधिकारी अनुनय झा ने टीमवर्क और जनसहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
उनका कहना है कि प्रशासन अकेले किसी भी जिले के विकास को अपेक्षित गति नहीं दे सकता। इसके लिए अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया और आम जनता के बीच बेहतर संवाद और समन्वय आवश्यक है।
मुरादाबाद जैसे बड़े जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की अपनी अलग-अलग आवश्यकताएं हैं। शहर में यातायात, सफाई, जल निकासी, सड़क और नागरिक सुविधाएं प्रमुख विषय हो सकते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रहते हैं।
ऐसे में जिलाधिकारी के सामने प्रशासनिक प्राथमिकताओं को जमीन पर लागू करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी होगी।
जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण पर रहेगा जोर
नई जिम्मेदारी संभालने के बाद डीएम के शुरुआती निर्देशों में जनसुविधा और लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर दिखाई दिया।
सरकारी कार्यालयों में आने वाले आम नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय यह होता है कि उनकी समस्या को सुना जाए और उसे तय समयसीमा में आगे बढ़ाया जाए। ऐसे में जनशिकायतों की निगरानी और लंबित प्रकरणों की समीक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए और शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो।
आने वाले समय में इन निर्देशों के क्रियान्वयन और विभागवार समीक्षा पर भी प्रशासनिक निगाह रहेगी।
विकास कार्यों की समयसीमा पर भी रहेगी नजर
जिलाधिकारी ने विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं के लिए अलग-अलग समयसीमा के आधार पर प्रगति का आकलन करने की बात कही।
इसका उद्देश्य यह हो सकता है कि जिन कार्यों को कुछ महीनों में पूरा किया जा सकता है, उन्हें लंबित न रखा जाए और बड़े प्रोजेक्ट के लिए स्पष्ट समयसीमा तथा चरणबद्ध समीक्षा की व्यवस्था बनी रहे।
मुरादाबाद में विकास परियोजनाओं के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं से जुड़े स्थानीय मुद्दे भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन प्राथमिकताओं को किस तरह जमीन पर लागू करता है।
मुरादाबाद के लिए नई प्रशासनिक शुरुआत
नए जिलाधिकारी के कार्यभार संभालने के साथ मुरादाबाद प्रशासन में नई कार्यशैली और नई प्राथमिकताओं की शुरुआत के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
कलेक्ट्रेट के औचक निरीक्षण से लेकर अधिकारियों को जनसुविधा पर ध्यान देने के निर्देश और मीडिया के साथ नियमित संवाद की पहल तक, डीएम अनुनय झा ने शुरुआत में ही अपनी कार्यशैली को लेकर कुछ स्पष्ट संकेत दिए हैं।
उनकी प्राथमिकताओं में जनशिकायतों का निस्तारण, प्रशासनिक पारदर्शिता, विकास कार्यों की समीक्षा, जनसंवाद और टीमवर्क प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
अब मुरादाबाद की जनता की नजर आने वाले महीनों में इन प्राथमिकताओं के वास्तविक क्रियान्वयन पर रहेगी। जनशिकायतों, विकास योजनाओं, यातायात, स्वच्छता, बुनियादी सुविधाओं और अन्य स्थानीय मुद्दों पर प्रशासन की कार्रवाई यह तय करेगी कि नई प्रशासनिक व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है।
मुरादाबाद के लिए यह नई जिम्मेदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब शहर और जिले की बढ़ती आवश्यकताओं के साथ प्रशासन के सामने विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे मौजूद हैं। ऐसे में जिलाधिकारी अनुनय झा के पिछले प्रशासनिक अनुभव और उनके द्वारा बताई गई कार्यशैली का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।
मुरादाबाद की नई प्रशासनिक पारी की शुरुआत हो चुकी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि शुरुआती निर्देश और प्राथमिकताएं आने वाले महीनों में किस तरह जमीन पर दिखाई देती हैं।
— सागर और ज्वाला | एक ज्वलंत आवाज़







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