मुरादाबाद बार चुनाव में बढ़ी सरगर्मी, बार काउंसिल ने एल्डर्स कमेटी को दिए निष्पक्ष चुनाव के निर्देश
कार्यालय में ताला और खाते सीज करने की शिकायतों पर सख्त रुख, ‘वन बार-वन वोट’ सिद्धांत के पालन पर जोर
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द बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद के वार्षिक चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अध्यक्ष, महासचिव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष, कार्यकारिणी सदस्य एवं जूनियर कार्यकारिणी सदस्य सहित विभिन्न पदों के लिए दावेदारों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। संभावित प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ लगातार बैठकें कर चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं, जिससे बार परिसर का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया है।

इसी बीच चुनाव प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न विवाद और विभिन्न प्रकार की चर्चाओं के बीच बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए पूरे मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बार काउंसिल के इस आदेश के बाद मुरादाबाद बार के चुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लगने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
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एल्डर्स कमेटी को सौंपा गया चुनाव का दायित्व
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शिव किशोर गौर द्वारा 10 जुलाई, 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि द बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद की वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल 1 अगस्त, 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में आगामी चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने का उत्तरदायित्व एल्डर्स कमेटी को सौंपा गया है।

आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एल्डर्स कमेटी को चुनाव कराने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक और संगठनात्मक अधिकार प्राप्त होंगे तथा वर्तमान कार्यकारिणी अथवा अन्य किसी व्यक्ति द्वारा उसके कार्यों में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। बार काउंसिल ने यह भी कहा है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था और बार की गरिमा के विपरीत माना जाएगा।
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कार्यालय में ताला और बैंक खाते सीज करने के आरोप
बार काउंसिल को भेजे गए पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि एल्डर्स कमेटी के कार्यों में बाधा उत्पन्न करने के उद्देश्य से बार कार्यालय पर ताला लगाए जाने तथा बैंक खातों को सीज करने जैसे कदम उठाए गए हैं। इन घटनाओं से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने निर्देश दिया है कि यदि इस प्रकार की कोई कार्रवाई की गई है तो उसे तत्काल समाप्त किया जाए और चुनाव प्रक्रिया को निर्बाध एवं सुचारु रूप से संचालित होने दिया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या वित्तीय बाधा उत्पन्न कर चुनाव प्रक्रिया में व्यवधान पैदा करना अनुचित माना जाएगा।
सहयोग नहीं करने पर हो सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई
बार काउंसिल ने अपने आदेश में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि वर्तमान कार्यकारिणी अथवा कोई अन्य पदाधिकारी एल्डर्स कमेटी को चुनाव कराने में सहयोग नहीं देता है या चुनाव प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके विरुद्ध अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बार काउंसिल की यह चेतावनी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार का विवाद या अव्यवस्था उत्पन्न न हो और अधिवक्ताओं के बीच लोकतांत्रिक परंपराएं मजबूत हों।
‘वन बार-वन वोट’ सिद्धांत का सख्ती से होगा पालन
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया ‘वन बार-वन वोट’ सिद्धांत के अनुरूप कराई जाएगी। इसके अंतर्गत केवल वही अधिवक्ता मतदान करने के पात्र होंगे, जिनके पास बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा जारी वैध सीओपी (Certificate of Practice) उपलब्ध है।
जिन अधिवक्ताओं के पास वैध सीओपी नहीं है, वे न तो मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे और न ही किसी पद के लिए चुनाव लड़ने के पात्र होंगे। इस निर्देश के बाद अधिवक्ताओं के बीच अपने दस्तावेजों को अद्यतन कराने की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
अधिवक्ताओं की नजर अब एल्डर्स कमेटी पर
बार काउंसिल के आदेश के बाद अब मुरादाबाद के अधिवक्ताओं की निगाहें एल्डर्स कमेटी पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा होते ही चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी। विभिन्न पदों के संभावित प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के साथ जनसंपर्क अभियान शुरू करने की तैयारी में हैं।
बार एसोसिएशन के चुनाव केवल संगठनात्मक नेतृत्व के चयन तक सीमित नहीं होते, बल्कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े अनेक प्रशासनिक, सामाजिक और अधिवक्ता हितों से संबंधित निर्णयों पर भी इनका व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए मुरादाबाद बार का यह चुनाव अधिवक्ता समाज के लिए विशेष महत्व रखता है।
मुरादाबाद बार की गौरवशाली परंपरा
मुरादाबाद जिला बार एसोसिएशन प्रदेश की प्रमुख बार एसोसिएशनों में से एक मानी जाती है। यहां के चुनाव हमेशा से अधिवक्ताओं के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, संगठनात्मक एकता और न्यायिक गरिमा के प्रतीक रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि बार की मजबूती और एकजुटता न्यायिक व्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाती है।
ऐसे में बार काउंसिल द्वारा जारी निर्देशों को आगामी चुनाव को पारदर्शी, निष्पक्ष और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सागर और ज्वाला का मत
द बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद के चुनाव केवल पदों के चयन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह अधिवक्ताओं की एकता, लोकतांत्रिक परंपरा, पेशे की गरिमा और न्यायिक व्यवस्था में विश्वास से भी जुड़े हुए हैं। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा एल्डर्स कमेटी को स्वतंत्र रूप से चुनाव संपन्न कराने के निर्देश इस बात का संकेत हैं कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और विवाद रहित बनाए रखना समय की आवश्यकता है।
सागर और ज्वाला का मानना है कि बार की गरिमा और परंपरा को बनाए रखने के लिए सभी अधिवक्ताओं को व्यक्तिगत मतभेदों और गुटबाजी से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए तथा एल्डर्स कमेटी को पूर्ण सहयोग प्रदान करना चाहिए। चुनाव ऐसा हो जिसमें प्रत्येक अधिवक्ता की भागीदारी सुनिश्चित हो और परिणाम सभी के लिए सम्मानपूर्वक स्वीकार्य हों।
मुरादाबाद बार की एक गौरवशाली परंपरा रही है। यह आवश्यक है कि इस वर्ष का चुनाव भी भाईचारे, पारदर्शिता, अनुशासन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के साथ संपन्न हो, ताकि अधिवक्ता समाज को एक मजबूत, सक्षम और प्रभावी नेतृत्व प्राप्त हो सके।
– संपादकीय विभाग, सागर और ज्वाला न्यूज







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