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दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढही, 7 लोगों की मौत

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढही, 7 लोगों की मौत

हादसे से मचा हड़कंप

नई दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में स्थित सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। यह इमारत छात्रों के लिए PG/हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में पुलिस, दमकल विभाग तथा आपदा राहत दल मौके पर पहुंचे।

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ताज़ा जानकारी के अनुसार इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है, जबकि 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

कैसे हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इमारत अचानक तेज आवाज के साथ नीचे आ गिरी। इसके बाद इलाके में धूल का बड़ा गुबार फैल गया। आसपास मौजूद छात्रों और स्थानीय लोगों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की।

बाद में पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस और आपदा राहत दलों ने व्यवस्थित तरीके से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। स्थानीय लोगों द्वारा शुरुआती समय में किए गए प्रयासों से भी कुछ लोगों को बचाने में मदद मिली।

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मलबे में फंसे लोगों की तलाश

हादसे के बाद बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए भारी मशीनों, स्निफर डॉग्स और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया। राहत कार्य कई घंटों तक चला।

बचाव दलों ने मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया ताकि अंदर फंसे लोगों को नुकसान न पहुंचे। एक छात्र के मलबे में फंसे होने की सूचना मिलने के बाद उसे भी बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया।

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इमारत की हालत और निर्माण कार्य पर सवाल

शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमारत काफी पुरानी थी और हाल ही में इसमें मरम्मत एवं निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। रिपोर्टों के अनुसार बेसमेंट में भी काम किया जा रहा था।

प्रारंभिक जांच में पानी जमा होने और चल रहे मरम्मत कार्य को संभावित कारणों में शामिल किया गया है। हालांकि, इमारत गिरने का अंतिम और आधिकारिक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी पुरानी इमारत में छात्रों को रहने की अनुमति कैसे मिली और भवन की सुरक्षा की जांच समय पर क्यों नहीं की गई।

घटना ने दिल्ली में पुराने मकानों, PG और हॉस्टल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए हैं।

इमारत के मालिक पर कार्रवाई

हादसे के बाद पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम को गिरफ्तार किया है। पुलिस उनसे इमारत की स्थिति, उसमें चल रहे निर्माण/मरम्मत कार्य और अन्य संबंधित मामलों को लेकर पूछताछ कर रही है।

इसके अलावा दिल्ली नगर निगम ने पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। अधिकारियों की भूमिका और कथित लापरवाही की भी जांच की जा रही है।

दिल्ली सरकार ने क्या कहा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर दुख व्यक्त किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है।

सरकार की ओर से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुराने और सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों की सुरक्षा जांच तथा Structural Audit और Safety Certification जैसी व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई है।

सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो भी वायरल

हादसे के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए। हालांकि, फैक्ट-चेक में सामने आया कि कुछ वायरल वीडियो सत्य निकेतन हादसे के नहीं थे। कुछ वीडियो पुराने हादसों से संबंधित पाए गए।

इसलिए इस घटना से संबंधित जानकारी लेते समय केवल विश्वसनीय समाचार स्रोतों और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है।

हादसे ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में PG और हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल होने वाली पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

मुख्य सवाल हैं:

  • क्या इमारत का नियमित Structural Audit हुआ था?
  • क्या बेसमेंट में चल रहा निर्माण कार्य नियमों के अनुसार था?
  • क्या भवन में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम थे?
  • क्या संबंधित अधिकारियों ने पहले इमारत का निरीक्षण किया था?
  • अगर इमारत में पहले से कोई समस्या थी, तो उसे खाली क्यों नहीं कराया गया?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ यह हादसा केवल एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि शहरी भवनों की सुरक्षा, पुराने निर्माण, PG और हॉस्टल की निगरानी तथा प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई गंभीर सवाल सामने लाता है।

हादसे में 7 लोगों की जान चली गई और 12 लोगों को बचाया गया। पुलिस और प्रशासन की जांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि इमारत वास्तव में किन परिस्थितियों में गिरी और इस हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।

जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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