बार एसोसिएशन चुनाव पर गहराया असमंजस: एल्डर्स कमेटी के फैसले पर उठे सवाल, अध्यक्ष बोले—बार काउंसिल को पहले ही भेजी जा चुकी है सूचना
विशेष रिपोर्ट | सागर और ज्वाला न्यूज़
Table of Contents
Toggleमुरादाबाद। जिला बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद के वार्षिक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद अधिवक्ता समाज में असमंजस और चर्चाओं का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही प्रक्रिया, समय-निर्धारण और निर्णय लेने के तरीके को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब स्वयं चुनाव प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच मतभेद की स्थिति सामने आ रही है, तो चुनाव की पारदर्शिता, निष्पक्षता और वैधानिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।
हालांकि, अभी तक चुनाव कार्यक्रम प्रभावी है और किसी भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा इसे निरस्त किए जाने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में अधिवक्ताओं की निगाहें अब आगामी घटनाक्रम और संबंधित प्राधिकारियों के निर्णय पर टिकी हुई हैं।
एल्डर्स कमेटी के भीतर भी सामने आए मतभेद
हाल के दिनों में प्रकाशित समाचारों और बार परिसर में चल रही चर्चाओं के अनुसार, एल्डर्स कमेटी के कुछ सदस्यों ने चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं दूसरी ओर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी यह प्रश्न उठाया है कि चुनाव कार्यक्रम जारी करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया गया।
विदेशी ताकतों और स्वार्थ की राजनीति से सावधान रहें युवा, राष्ट्रहित को रखें सर्वोपरि
इन परिस्थितियों ने अधिवक्ता समाज के बीच यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या चुनाव प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सभी संबंधित पक्षों को पर्याप्त रूप से विश्वास में लिया गया था।
विवाद चुनाव कराने को लेकर नहीं, बल्कि प्रक्रिया को लेकर
बार परिसर में सबसे महत्वपूर्ण चर्चा इस बात को लेकर है कि विवाद चुनाव कराने को लेकर नहीं है, बल्कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की प्रक्रिया और उसके समय-निर्धारण को लेकर है।
अनेक अधिवक्ताओं का कहना है कि बार जैसे लोकतांत्रिक संस्थान में चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, नियमसम्मत और सर्वसम्मति के वातावरण में संपन्न होनी चाहिए। यदि प्रक्रिया को लेकर ही प्रश्न उठने लगें, तो इससे चुनाव की विश्वसनीयता पर अनावश्यक बहस शुरू हो सकती है।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने क्या कहा?
बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से पूर्व बार एसोसिएशन के निर्वाचित पदाधिकारियों से विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए थी।
उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जानकारी पूर्व में ही बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भेजी जा चुकी है। उनके अनुसार विभिन्न बिंदुओं पर अपना पक्ष सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है और अब आगे के निर्देशों एवं निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है।
अध्यक्ष का कहना है कि यदि बार काउंसिल की ओर से कोई दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं तो उनका पालन किया जाएगा।
एल्डर्स कमेटी सदस्य महेश चंद्र त्यागी की आपत्तियां
एल्डर्स कमेटी के सदस्य महेश चंद्र त्यागी ने भी चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि संबंधित बैठक की सूचना उन्हें समय पर नहीं दी गई और निर्णय नियमों के अनुरूप नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव दिसंबर माह में होना चाहिए था तथा बार काउंसिल के संविधान और निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
इन बयानों के बाद अधिवक्ताओं के बीच यह चर्चा और तेज हो गई है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुई या नहीं।
एल्डर्स कमेटी का पक्ष
दूसरी ओर एल्डर्स कमेटी का कहना है कि चुनाव कार्यक्रम उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के निर्देशों और उपलब्ध नियमों के अनुसार घोषित किया गया है।
कमेटी के अनुसार सदस्यता शुल्क जमा करने, मतदाता सूची के प्रकाशन, आपत्तियां आमंत्रित करने, नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी, मतदान तथा मतगणना की पूरी समय-सारिणी पहले ही जारी की जा चुकी है और चुनाव प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है।
एल्डर्स कमेटी का यह भी कहना है कि चुनाव निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
अध्यक्ष और महासचिव की भूमिका को लेकर भी उठे सवाल
बार परिसर में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से पूर्व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं महासचिव के साथ आवश्यक औपचारिक संवाद और प्रक्रिया को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं।
अनेक अधिवक्ताओं का मानना है कि बार की लोकतांत्रिक परंपराओं को देखते हुए महत्वपूर्ण निर्णयों में सभी संबंधित पदाधिकारियों की सहभागिता और संवाद आवश्यक होना चाहिए। इसी कारण यह विषय भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
कम समय में चुनावी प्रक्रिया पूरी करने पर उठे प्रश्न
घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सदस्यता नवीनीकरण, मतदाता सूची का प्रकाशन, आपत्तियां, अंतिम मतदाता सूची, नामांकन, जांच, नाम वापसी, प्रचार, मतदान और मतगणना जैसी सभी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं अपेक्षाकृत कम समय में पूरी की जानी हैं।
कई अधिवक्ताओं का कहना है कि इतनी व्यापक चुनावी प्रक्रिया को सीमित समय में पूरा करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनका मानना है कि यदि पर्याप्त समय उपलब्ध हो तो अधिक अधिवक्ता सदस्यता प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे और चुनाव में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी।
सावन माह के कारण भी जताई जा रही चिंता
वर्तमान समय में पवित्र सावन माह चल रहा है। बड़ी संख्या में अधिवक्ता धार्मिक अनुष्ठानों, कांवड़ यात्रा, शिव पूजन तथा अन्य धार्मिक आयोजनों में व्यस्त रहते हैं।
कुछ अधिवक्ताओं का मानना है कि इस अवधि में चुनावी प्रक्रिया संचालित होने से सभी मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी प्रभावित हो सकती है। उनका सुझाव है कि यदि आवश्यक हो तो सभी पक्षों की सहमति से समय-निर्धारण पर पुनर्विचार किया जा सकता है ताकि अधिकतम अधिवक्ता चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकें।
संवाद और सहमति से समाधान की उम्मीद
बार परिसर में अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं की राय है कि चुनाव जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को विवादों से दूर रखते हुए सभी पक्षों के बीच संवाद स्थापित किया जाना चाहिए।
उनका मानना है कि यदि एल्डर्स कमेटी, बार एसोसिएशन, वरिष्ठ अधिवक्ता और संबंधित पक्ष आपसी सहमति से समाधान निकालते हैं, तो इससे न केवल विवाद समाप्त होंगे बल्कि बार की गरिमा और अधिवक्ताओं का विश्वास भी मजबूत होगा।
फिलहाल क्या है वर्तमान स्थिति?
अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार—
- बार एसोसिएशन चुनाव निरस्त नहीं हुए हैं।
- 20 अगस्त 2026 को मतदान तथा 21 अगस्त 2026 को मतगणना का कार्यक्रम फिलहाल प्रभावी है।
- चुनाव कार्यक्रम में किसी प्रकार का आधिकारिक संशोधन या स्थगन आदेश अभी तक जारी नहीं हुआ है।
- चुनाव प्रक्रिया को लेकर बार एसोसिएशन, एल्डर्स कमेटी तथा कुछ अधिवक्ताओं के बीच मतभेद और आपत्तियां बनी हुई हैं।
- यदि भविष्य में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश अथवा किसी सक्षम न्यायालय द्वारा कोई नया आदेश जारी किया जाता है, तो चुनाव कार्यक्रम में परिवर्तन संभव हो सकता है।
सभी की निगाहें अगले घटनाक्रम पर
फिलहाल अधिवक्ता समाज की निगाहें बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, एल्डर्स कमेटी तथा बार एसोसिएशन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उठाई गई आपत्तियों पर सक्षम प्राधिकारी क्या निर्णय लेते हैं और चुनाव कार्यक्रम पूर्व निर्धारित तिथि पर ही संपन्न होता है या परिस्थितियों के अनुसार उसमें कोई संशोधन किया जाता है।
निष्कर्ष
मुरादाबाद बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर एल्डर्स कमेटी चुनाव कार्यक्रम को नियमों के अनुरूप बता रही है, वहीं दूसरी ओर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सहित कुछ सदस्यों ने प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई हैं। विवाद चुनाव कराने को लेकर नहीं बल्कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की प्रक्रिया, समय-निर्धारण और नियमों के पालन को लेकर है।
जब तक बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश अथवा कोई सक्षम न्यायिक प्राधिकारी इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं देता, तब तक घोषित चुनाव कार्यक्रम प्रभावी माना जाएगा। आने वाले दिनों में होने वाले निर्णय यह तय करेंगे कि चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न होंगे या उनमें कोई परिवर्तन किया जाएगा।
संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं, प्रकाशित समाचारों तथा संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी पक्ष के आरोप या दावों को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। यदि किसी भी पक्ष का अतिरिक्त आधिकारिक पक्ष या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
— सागर और ज्वाला न्यूज़ डेस्क







Users Today : 0
Users Last 30 days : 60
Total Users : 25182
Total views : 47510