शराब की लत ने फीकी की त्योहार कि रौनक
सौरभ मिश्र (उप संपादक) , सागर और ज्वाला न्यूज
अभी जिंदा हूं तो जी लेने दो,भरी बरसात में पी लेने दो,
मुझे पीने का शौक नहीं पीता हूं गम भुलाने को
चार बोतल वोडका
काम मेरा रोज का
शराब चीज ही ऐसी है,
न छोड़ी जाए यह मेरे यार के जैसी है ।
यह उदाहरण है कुछ गीतों के जो आज के युवा वर्ग की पहली पसंद बन चुके है।
आज का युवा पर वर्ग आधुनिकता की दौड़ में इतना आगे निकल चुका है कि खुद को आधुनिक दिखाने के लिए नवयुवको/ नव युवतियों द्वारा विभिन्न प्रकार के नशों का सेवन खुलेआम किया जा रहा है और नशा के सेवन को वह आधुनिकता का पर्याय मानते हैं। शायद इसीलिए चाहे त्यौहार हो, शादी हो, या कोई दुखद पल । आज के युवा हर तरह के पल को शराब के साथ ही बिताना पसंद करते हैं।
पिछले 20 वर्षो के दौरान युवा वर्ग का नशे के प्रति आकर्षण बहुत तेजी से बढ़ा है जोकि एक गंभीर चिंता का विषय है । नशे के प्रति बढ़ते हुए आकर्षण का ही परिणाम है कि आज होली और दीवाली जैसे बड़े त्यौहार भी फीके नजर आते हैं ।
बाजारों से रौनक गायब है और समाज से आत्मीयता।
आज के समय में सभी त्योहारों पर युवा पीढ़ी के लिए मुख्य आकर्षण वे पर्व न होकर इन पर्वों पर शराब के सेवन को प्राथमिकता देने लगा है। सागर को ज्वाला की टीम ने इस मुद्दे पर कई सारे युवाओं से खुलकर बातचीत की तो नाम ना बताने और फोटो न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि होली पर पर रंग खेलने या तरह-तरह की मिठाइयां खाना या नए-नए कपड़े पहनकर एक दूसरे के घर जाना उनको उतना पसंद नहीं है जितना की होली की पूर्व संध्या से लेकर संपूर्ण होली पर्व के दौरान अपने युवा साथियों के साथ विभिन्न ब्रांड की शराब का सेवन करने हेतु शराब पार्टीके आयोजन का है। जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया की भाग दौड़ की जिंदगी में जहां पैसे के पीछे भाग रहे इंसान के पास परिवार के साथ बैठने का भी वक्त नहीं है ऐसे में अपने गमों और खुशियों का इजहार करने के लिए उन्हें शराब का सहारा लेना पड़ता हैं। युवा वर्ग के द्वारा इस अप्रत्याशित उत्तर को सुनकर सागर और ज्वाला की टीम सोच में पड़ गई और सोचने लगी कि अगर देश के युवाओं को व्यसनो की ओर बढ़ने से नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं होगा जब हमारे आने वाली पीढ़ी को होली और दिवाली या उन त्योहारों के बारे में जानकारी केवल गूगल के माध्यम से ही मिल सकेगी ना की अपने पारिवारिक माहौल में। अगर आज हमने अपने देश की युवा पीढ़ी को भौतिकतावादी इस युग में शराब और अन्य व्यसनों से दूर रखने का प्रयास करे। अन्यथा भविष्य में निम्न लिखित शब्द सच न हो जाए
डगमगाते पांव मेरे ,मंजिलों की दौड़ में ।
होश मुझको कब रहा है, मयखाने के दौर में ।
न जाने कितने घर उजाड़े ,हैं इस दिल फरेब ने ।
फिर भी खुल रहे हैं मयखाने हर गली हर मोड़ पर।
आइए होली कै इस रंग भरे पर्व पर अपनी युवा पीढ़ी को पारंपरिक होली के बारे में बताएं और सभी लोग मिलजुल कर उल्लास और जोश के साथ परंतु शराब के नशे से दूर रहकर होली मनाए।
सागर और ज्वाला न्यूज के सभी पाठको एवम भारत वासियों को सागर और ज्वाला न्यूज परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं। गुजिया की मिठास सी सदा मीठी रहे आपकी बोली
खुशियों से भरी रहे आपकी झोली
आपको और आपके परिवार को हैप्पी होली!


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