सुनियोजित ढंग से की संभल को जलाने की कोशिश
सौरभ मिश्रा, सागर और ज्वाला न्यूज़
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संभल जनपद संभल की संभल तहसील में स्थित शाही जामा मस्जिद पर कैला देवी के महंत जगदीश गिरी द्वारा अदालत में एक याचिका दायर की गई जिसमें यह आरोप लगाया गया कि शाही जामा मस्जिद हिंदू धर्म के प्रसिद्ध हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। अदालत द्वारा इस याचिका को स्वीकार कर लिया गया और उक्त मस्जिद का सर्वे करने के लिए आदेश दिया। चार दिन पूर्व एडवोकेट कमिश्नर एवं दोनों ही पक्षों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में जामा मस्जिद की वीडियोग्राफी की गई। इस बात से मुस्लिम समाज में आक्रोश था ।

अदालत द्वारा आज दिनांक 24 नवंबर 2024 दिन रविवार को मस्जिद के अंदर की संपूर्ण वीडियोग्राफी कर 30 नवंबर तक अदालत में उसको सौंपने का आदेश दिया। अदालत के आदेश अनुसार आज जब सर्वे टीम सुबह 7 बजे सम्भल पहुंची और सर्वे कार्य प्रारंभ किया तभी कुछ ही देर बाद एक विशेष समुदाय के हजारों लोग वहां इकट्ठे होने लगे तथा मस्जिद में घुसने का प्रयास करने लगे। जब पुलिस बल द्वारा उन्हें ऐसा करने से मना किया गया तो वह धार्मिक नारे लगाने लगें और अचानक से भीड़ में से अपने चेहरे को ढके युवकों द्वारा पुलिस बल पर पत्थर बरसाने प्रारंभ कर दिए तथा वहां रास्ते में खड़ी दो पहिया व चार पहिया वाहनों को आग के हवाले करने लगे। ऐसे में पुलिस बल द्वारा पहले संयम से काम लेकर उनको समझा ने का प्रयास किया । लगातार मस्जिद से यह अनाउंसमेंट करवाया कि अंदर दोनों ही पक्षों के वकील मौजूद है और अंदर कुछ भी असामान्य नहीं हों रहा है ।परंतु भीड़ में मौजूद कुछ उपद्रवियों द्वारा भीड़ को भड़काने का प्रयास किया गया और भीड़ द्वारा अचानक भयानक रूप धारण कर लिया गया। ऐसे में पुलिस बल को सुरक्षा के आधार पर भीड़ को तितर वितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए । इस पर भी जब भीड़ शांत नहीं हुई तो पुलिस द्वारा लाठी चार्ज का प्रयोग किया गया।

सूत्रों के अनुसार इस घटना को अंजाम देने की योजना सुनियोजित थी । उपद्रवियों द्वारा उस क्षेत्र में लगे अधिकांश सीसीटीवी कैमरो को या तो पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया या उनका रुख दूसरी तरफ मोड़ दिया गया । इसके अलावा अपने चेहरे पर नकाब, मास्क आदि लगाकर अपनी पहचान को छिपाने का भरपूर प्रयास किया। साथ ही साथ उक्त घटनास्थल से कुछ दूर चल रहे निर्माण स्थल से बड़ी मात्रा में सीटों को इकट्ठा कर आसपास के घरों की छतों पर इकट्ठा किया गया । ताकि सुनीयोजित तरीके से पुलिस बल पर हमला किया जा सके।
यह हमला कितना सुनि योजित था इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उपद्रवियों द्वारा वहां खड़े किसी भी स्थानीय वाहन को नुकसान नहीं पहुंचाया गया बल्कि पुलिस बल की कारों को तथा बाहर के क्षेत्र के नंबर वाली चार पहिया और दो पहिया वाहनों को जमकर क्षतिग्रस्त किया गया ।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इस दौरान दर्जन भर से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त किए गए , तीस से अधिक पुलिस कर्मी घायल हो गए और दो युवकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है ।
पुलिस अधिकारियों द्वारा यह दावा भी किया गया कि इस घटना में परोक्ष या अपरोक्ष रूप से जिम्मेदार लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नही जाएगा।
संभल पुलिस के सिंघम को देखकर कांपी उपद्रवियों की रूहें
पुलिसकर्मी अपने सेनापति श्री कृष्ण कुमार बिश्नोई के नेतृत्व में आगे बढ़ने लगे। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के इस निडर रूप को देखकर उपद्रवियों की सांस फूल गई।

सम्भल कुछ वर्षों पूर्व हिंदी सिनेमा के अंतर्गत एक चर्चित फिल्म आई थी सिंघम ,जिसमें अजय देवगन द्वारा एक ईमानदार और निडर पुलिस ऑफिसर का रोल किया गया था उक्त फिल्म में सिंघम नामक उस पुलिस वाले द्वारा अपने जन्म स्थान से कई किलोमीटर दूर मुंबई जैसे शहर में जहां हर और अंडरवर्ल्ड के आदमियों का खतरा मंडराता रहता था उसको अपनी सूझबूझ और निडरता के आधार पर पूर्ण रूप से खत्म कर दिया । लेकिन आज हम बात कर रहे हैं एक रियल लाइफ के सिंघम की । यह सिंघम कोई और नहीं बल्कि जिला संभल के पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण कुमार बिश्नोई जी हैं जिन्होंने आज संभल में हुए उपद्रव के बीच अपनी सिंघम वाली छवि के माध्यम से उपद्रवियों की हालत खराब कर दी ।
हुआ यूं कि जब अदालत के आदेश पर कोर्ट कमिश्नर की टीम सर्वे करने सम्भल नगर स्थित शाही जामा मस्जिद पहुंची तो एक विशेष समुदाय के हजारों लोगों की भीड़ द्वारा उस टीम को सर्वे करने से रोकने के उद्देश्य से पहले नारेबाजी प्रारंभ की तत्पश्चात पुलिस बल पर पत्थर बरसाने प्रारंभ कर दिए ऐसे में जब पुलिस बल के अधिकांश पुलिसकर्मी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपते घूम रहे थे ऐसे में पुलिस अधीक्षक संभल श्री कृष्ण कुमार बिश्नोई द्वारा पहले उसे भीड़ में मौजूद उपद्रवियों को समझने का प्रयास किया गया कि वे लोग नेताओं के बहकावे में ना आए और अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ ना करें । परंतु जब उन्होंने देखा कि भीड़ में मौजूद उपद्रवी न केवल ईंट पत्थर ही पुलिस वालों पर बरसा रहे हैं बल्कि अवैध हथियारों से उन पर फायर भी झोंक रहे हैं और वाहनों को जला रहे है । ऐसे में बुलेट प्रूफ जैकेट पहनकर तथा हाथ में राइफल लेकर श्री कृष्ण कुमार बिश्नोई जी एक सेनापति के रूप में निडर उस भीड़ की ओर बढ़े। अपने पुलिस अधीक्षक के इस रूप को देखकर पुलिस कर्मी भी दंग रह गए और उनमें भी जोश आ गया तथा पुलिसकर्मी अपने सेनापति श्री कृष्ण कुमार बिश्नोई के नेतृत्व में आगे बढ़ने लगे। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के इस निडर रूप को देखकर उपद्रवियों की सांस फूल गई और उपद्रवियों की भीड़ ने अपनी जान बचाने के उद्देश्य से इधर-उधर भागना प्रारंभ कर दिया। कृष्ण कुमार बिश्नोई जी के इस अंदाज से पुलिसकर्मियों में उत्साह भर गया और उन्होंने दोगुनी उत्साह के साथ में उपद्रवियों को खदेड़ना प्रारंभ कर दिया तथा साथ ही साथ उनकी धर पकड़ प्रारंभ कर दी।


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