संभल जामा मस्जिद में खूब हुआ अवैध निर्माण, मूल स्वरूप बदला, हमें भी नहीं मिली एंट्री…’, ASI ने दी कोर्ट को जानकारी
एड सुरजीत सिंह, सागर और ज्वाला न्यूज
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Toggleसम्भल एएसआई ने कोर्ट को बताया है कि मस्जिद परिसर में प्राचीन इमारतों और पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण अधिनियम 1958 के प्रावधानों का सरासर उल्लंघन हो रहा है. लेकिन जब भी एएसआई की टीम दौरा करने जाती, उसे रोकने के साथ हर बार स्थानीय लोग पुलिस में शिकायत भी करते रहे.भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) ने कोर्ट में दाखिल किए अपने हलफनामे में कहा है कि उनकी टीम को भी संभल जामा मस्जिद मे दाखिल नहीं होने दिया गया. एएसआई ने कोर्ट से कहा कि 1920 से ही इस मस्जिद के संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी हमारे पास है. लेकिन लंबे समय से हमारी टीम को मस्जिद में जाने से रोका जाता रहा है. इसलिए इसके मौजूदा स्वरूप के बारे में जानकारी हमारे पास नहीं है.।एएसआई के मुताबिक समय-समय पर जब भी इस हेरिटेज मस्जिद का मुआयना करने टीम गई, लोग आपत्ति जताते हुए उसे आगे जाने रोक देते थे. लिहाजा एएसआई को मस्जिद परिसर में अंदरूनी तौर पर हुए मनमाने निर्माण कार्यों की कोई जानकारी नहीं है. एएसआई ने 1998 में इस मस्जिद का दौरा किया था. सबसे आखिरी बार इस साल जून में एएसआई अधिकारियों की टीम स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग से मस्जिद मे दाखिल हो पाई थी।
संभल की शाही जामा मस्जिद पर हाल ही में हुए एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि मस्जिद में कई ऐसे तत्व और अवशेष हैं जो इसके प्राचीन हिंदू मंदिर से जुड़े होने का संकेत देते हैं। 1875 की एएसआई रिपोर्ट में मस्जिद के स्तंभों और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को हिंदू मंदिर की वास्तुकला से संबंधित बताया गया है। मस्जिद में एक शिलालेख का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इसका निर्माण 933 हिजरी में मीर हिंदू बेग द्वारा हिंदू मंदिर को तोड़कर किया गया बताया गया है। इस दावे को “बाबरनामा” और प्राचीन अभिलेखों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, यह मामला अदालत में विचाराधीन है, और हालिया एएसआई रिपोर्ट को 29 नवंबर 2024 को अदालत में प्रस्तुत किया गया है।


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