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मुरादाबाद: आरएसएस की प्रमुखजन गोष्ठी में संगठन और राष्ट्र निर्माण पर जोर

मुरादाबाद: आरएसएस की प्रमुखजन गोष्ठी में संगठन और राष्ट्र निर्माण पर जोर

“हिंदुत्व भारत की जीवन शैली है” — प्रमुखजन गोष्ठी में महेन्द्र कुमार का संबोधन

संघ का उद्देश्य चरित्रवान नागरिकों का निर्माण — महेन्द्र कुमार

मुरादाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपने शताब्दी वर्ष (2025-26) के उपलक्ष्य में देशभर में ‘प्रमुखजन गोष्ठी’ का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को प्रातः 10:00 बजे पंचायत भवन में एक विचारात्मक एवं संवादात्मक प्रमुखजन गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रमुख व्यक्तियों ने सहभागिता की।

इस गोष्ठी का उद्देश्य समाज के प्रबुद्ध वर्ग के साथ संवाद स्थापित करना, संघ के कार्यों और विचारधारा से अवगत कराना तथा राष्ट्र निर्माण में सामूहिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना रहा।


संघ की शताब्दी यात्रा और विस्तार पर प्रकाश

गोष्ठी के मुख्य वक्ता क्षेत्र प्रचारक महेन्द्र कुमार ने अपने विस्तृत संबोधन में संघ की 100 वर्षों की यात्रा और उसके विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा बोया गया राष्ट्रवाद का बीज आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है।

उन्होंने कहा कि संघ का विस्तार आज देश के कोने-कोने तक हो चुका है और इसके स्वयंसेवक समाज के हर वर्ग में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संघ के विभिन्न आनुषंगिक संगठन शिक्षा, सेवा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, पर्यावरण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य कर रहे हैं।


हिंदुत्व की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा

अपने संबोधन में महेन्द्र कुमार ने हिंदुत्व की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे किसी एक धर्म या पूजा पद्धति से जोड़कर देखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के अनुसार, “हिंदुत्व भारत की जीवन शैली और उसकी सांस्कृतिक पहचान है।”

उन्होंने आगे कहा कि हिंदुत्व का मूल भाव समरसता, सहिष्णुता और समावेशिता है, जो भारतीय समाज की आधारशिला है। इस विचारधारा का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोकर राष्ट्र की एकता को मजबूत करना है।


संघ को लेकर भ्रांतियों पर दिया जवाब

महेन्द्र कुमार ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दल और विचारधाराएं संघ के बारे में गलत धारणाएं फैलाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ एक सामाजिक संगठन है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र निर्माण है, न कि राजनीति करना।

उन्होंने कहा, “संघ को समझना है तो संघ के कार्यों को करीब से देखना और उसमें भागीदारी करना आवश्यक है।” उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं की सहभागिता संघ की अलग-अलग व्यवस्थाओं के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में उनका योगदान भी महत्वपूर्ण है।


इतिहास के महत्वपूर्ण पड़ाव और चुनौतियां

संघ के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1948, 1975 और 1992 में संघ पर प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन समय के साथ ये प्रतिबंध न्यायालय और समाज द्वारा निराधार सिद्ध हुए।

उन्होंने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद संघ ने अपने कार्यों को निरंतर जारी रखा और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत किया। आपातकाल और अन्य संकटों के समय संघ के कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में भी योगदान दिया।


राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका

महेन्द्र कुमार ने कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है, जो चरित्रवान, अनुशासित और समाज के प्रति उत्तरदायी हों। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक केवल विचारों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि व्यवहारिक स्तर पर समाज की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आपदा, युद्ध और COVID-19 जैसे संकटों के दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने राहत कार्य, भोजन वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं और जनजागरूकता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से सामाजिक जागरण का आह्वान

अपने संबोधन में उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ का उल्लेख करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अंतर्गत उन्होंने निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की अपील की:

  • कुटुंब प्रबोधन (परिवारिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण)
  • पर्यावरण संरक्षण (प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी)
  • सामाजिक समरसता (जाति और वर्ग से ऊपर उठकर एकता)
  • नागरिक कर्तव्य (देश के प्रति जिम्मेदार व्यवहार)
  • स्वबोध जागरण (अपनी संस्कृति और पहचान का बोध)

उन्होंने कहा कि यदि समाज इन पांच बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करता है, तो राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन संभव है।


अध्यक्षीय संबोधन में संघ कार्यों की सराहना

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे चिरंजी लाल यादव ने अपने संबोधन में कहा कि संघ नवयुवकों को भारतीय संस्कृति, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की ओर प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि संघ द्वारा किए जा रहे कार्य समाज के लिए अनुकरणीय हैं और युवाओं को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।


शहर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति

इस अवसर पर विभाग संघचालक सुरेंद्रपाल सिंह, महानगर संघचालक डॉ. विनीत गुप्ता, विभाग प्रचार प्रमुख डॉ. पवन कुमार जैन, महानगर कार्यवाह विपिन चौधरी, वरिष्ठ प्रचारक मनीराम सहित अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

इसके साथ ही शहर के साहित्यकार, चिकित्सक, अधिवक्ता, शिक्षाविद एवं विभिन्न सामाजिक और आध्यात्मिक संस्थाओं से जुड़े प्रमुखजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सभी ने राष्ट्र निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।


निष्कर्ष

मुरादाबाद में आयोजित यह प्रमुखजन गोष्ठी न केवल संघ की विचारधारा को समझने का एक मंच बनी, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

इस प्रकार के आयोजनों से समाज में जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण के कार्यों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित हो सकती है। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकता है।

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