बदहाल राजा का सहसपुर जंक्शन : टॉयलेट-बिजली-पानी-फूड स्टॉल सब चौपट, निरीक्षण में खुली अव्यवस्थाओं की पोल

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Toggleमुरादाबाद : सागर और ज्वाला न्यूज।मंडल मुख्यालय से मात्र 25 किलोमीटर दूर राजा का सहसपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन की स्थिति इतनी बदहाल है कि यात्री नारकीय परिस्थितियों में यात्रा करने को मजबूर हैं। डी.आर.यू.सी.सी. सदस्य डॉ. पवन कुमार जैन द्वारा किए गए निरीक्षण में रेलवे प्रशासन की लापरवाही और व्यवस्थाओं की पोल खुल गई।

टॉयलेट बदहाली की इंतहा
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि दिव्यांग और महिला टॉयलेट पर ताले जड़े हुए थे। दिव्यांग टॉयलेट के सामने मोटरसाइकिल खड़ी होने के कारण ताला खुलने के बाद भी प्रवेश संभव नहीं था। पुरुष टॉयलेट खुला तो था, लेकिन उसकी स्थिति बेहद गंदी और दुर्गंधयुक्त पाई गई। यही हाल प्रथम श्रेणी प्रतीक्षा कक्ष का भी था, जिसे सामान रखकर स्टोर में बदल दिया गया है।

पानी की टोटियां गंदगी में डूबीं
प्लेटफार्म पर लगी प्याऊ गंदगी से इतनी लथपथ थी कि पानी न पीने योग्य था, न ही टॉयलेट उपयोग के लिए। डॉ. जैन ने कहा कि यह विडंबना है कि यात्री मुफ्त पानी की टोटी का भी उपयोग नहीं कर पा रहे, जबकि बोतलबंद पानी खरीदना सभी के लिए संभव नहीं है।
फूड स्टॉल पर गंदगी और अनियमितता
फूड स्टॉल की स्थिति और भी चिंताजनक मिली। सिंक की हालत टॉयलेट से भी बदतर थी। बिना यूनिफॉर्म का एक व्यक्ति खुले प्लेटफार्म पर गैस स्टोव से चाय बनाता पाया गया, जबकि सिलेंडर स्टेशन परिसर में कैसे पहुंचा, इसका कोई स्पष्ट जवाब जिम्मेदारों के पास नहीं था।
टिकट वेंडिंग मशीन वर्षों से खराब
स्टेशन पर लगाई गई टिकट वेंडिंग मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है और उपयोग में नहीं लाई जा रही है। डॉ. जैन ने इसे जनता के पैसों का दुरुपयोग करार दिया।
रेलवे प्रशासन पर उठे सवाल
डॉ. जैन ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब मंडलीय कार्यालय से महज 25 किमी की दूरी पर स्थित स्टेशन की यह हालत है, तो दूरदराज के स्टेशनों का हाल सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा – “बिना पैसा दिए यात्री केवल पानी की टोटी का प्रयोग करता है, परंतु वह भी उपयोग योग्य नहीं रही। पेड टॉयलेट या तो बंद पड़े हैं या गंदगी से भरे हैं। यह स्थिति रेलवे प्रशासन की उदासीनता का जीवंत उदाहरण है।”
राजा का सहसपुर जंक्शन की यह दयनीय हालत रेलवे यात्रियों के लिए न केवल असुविधा का कारण है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है।
सागर और ज्वाला का विश्लेषण : रुस्तमनगर–सहसपुर (बिलारी, मुरादाबाद) का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
रुस्तमनगर–सहसपुर, एवं राजा का सहसपुर स्टेशन मुरादाबाद जिले की तहसील बिलारी का एक प्राचीन और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध क्षेत्र है। यहाँ का इतिहास केवल एक गांव या कस्बे का नहीं, बल्कि स्थानीय सत्ता, संस्कृति और स्थापत्य विरासत का भी आईना है।
शाही परिवार और इतिहास की परतें
सागर और ज्वाला के अनुसार सहसपुर–बिलारी राजपरिवार केवल भूमि के मालिक नहीं रहे, बल्कि उन्होंने यहाँ की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को भी आकार दिया। उनके नियंत्रण में सैकड़ों गाँव आते थे। औरंगज़ेब के शासनकाल के बाद उन्हें राय की उपाधि मिली, जो उनकी बढ़ती शक्ति और सम्मान का प्रतीक था। यह राजपरिवार समय-समय पर जनता की भलाई में हमेशा तत्पर रहा है।
1909–13 के दौरान राजा बहादुर द्वारा निर्मित “मेस्टन निवास” सहसपुर की औपनिवेशिक छाया और शाही ठाट-बाट का सजीव उदाहरण है। सागर और ज्वाला मानते हैं कि यह भवन न केवल ब्रिटिश मेहमाननवाज़ी के लिए बना, बल्कि प्रथम विश्व युद्ध में भी अहम भूमिका निभाई, जब यहाँ इतालवी युद्धबंदी रखे गए। यह स्थल आज भी इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
चंदौसी की रानी की बावड़ी सहसपुर की स्थापत्य कला और जनकल्याणकारी सोच का प्रतीक मानी जाती है। सागर और ज्वाला ने इस बावड़ी को क्षेत्र की जल-प्रबंधन व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। यह बावड़ी सैनिकों, यात्रियों और स्थानीय बाशिंदों के लिए पानी व विश्राम का साधन रही। बावड़ी की खोज और उस पर शाही परिवार का दावा यह दर्शाता है कि इतिहास आज भी जीवंत है और अपने प्रमाण खोज रहा है।
सागर और ज्वाला का विश्लेषण यह भी रेखांकित करता है कि जहाँ सहसपुर का अतीत गौरवशाली रहा, वहीं वर्तमान में यह उपेक्षा का शिकार है। रेलवे स्टेशन और आसपास की व्यवस्थाएँ बदहाल हैं, नगर पंचायत का दर्जा अभी तक अधर में है और ऐतिहासिक धरोहरें संरक्षण के अभाव में जर्जर हो रही हैं।
सागर और ज्वाला का निष्कर्ष है कि रुस्तमनगर–सहसपुर एवं राजा का सहसपुर केवल भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि एक जीवंत इतिहास है, जहाँ अतीत और वर्तमान आमने-सामने खड़े हैं। यदि यहाँ की शाही धरोहरों, बावड़ी और औपनिवेशिक विरासत को संरक्षित कर पर्यटन से जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र न केवल मुरादाबाद, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र बन सकता है।






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