मुरादाबाद बार चुनाव पर बार काउंसिल का फिर बड़ा आदेश
31 अगस्त से पहले नई मतदान तिथि तय करने के निर्देश, 17 अगस्त तक मतदाता सूची देने की समयसीमा
मतदाता सूची को लेकर भी सख्ती, सूची नहीं मिलने पर एल्डर्स कमेटी स्वयं करेगी फ्रीज; बैंक खातों से रोक हटाने और बार भवन-कार्यालय का नियंत्रण सौंपने के निर्देश
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Toggleसागर और ज्वाला न्यूज | मुरादाबाद
मुरादाबाद की द बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने 10 अगस्त 2026 को जारी अपने ताजा आदेश में चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण और कड़े निर्देश जारी किए हैं। बार काउंसिल के अध्यक्ष शिव किशोर गौर द्वारा जारी आदेश में वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा बार काउंसिल की पूर्व स्वीकृति के बिना किए गए कथित नियमावली संशोधन को तत्काल प्रभाव से निष्प्रभावी एवं निरस्त घोषित किया गया है।
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आदेश में रामाशंकर की अध्यक्षता वाली एल्डर्स कमेटी को चुनाव कराने के लिए पूर्णतः वैधानिक निकाय माना गया है। बार काउंसिल ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि एल्डर्स कमेटी को चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए 31 अगस्त 2026 से पूर्व नई मतदान तिथि निर्धारित कर चुनाव प्रक्रिया संपन्न करानी होगी।
इस आदेश के बाद मुरादाबाद बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गंभीर चरण में पहुंच गया है। अब सभी की निगाहें एल्डर्स कमेटी द्वारा घोषित किए जाने वाले नए चुनाव कार्यक्रम पर टिकी हैं।
बिना बार काउंसिल की मंजूरी नियमावली में किया गया संशोधन निरस्त
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आदेश में कहा गया है कि वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा बार काउंसिल की स्वीकृति के बिना नियमावली में जो कथित संशोधन किया गया है, वह तत्काल प्रभाव से निष्प्रभावी और निरस्त माना जाएगा।
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आदेश में बार एसोसिएशन की नियमावली के Rule 53 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बार काउंसिल की स्वीकृति के बिना नियमावली अथवा बायलॉज में किया गया संशोधन विधिक दृष्टि से प्रभावी नहीं माना जा सकता।
इस निर्देश के बाद चुनाव प्रक्रिया, पात्रता, मतदाता सूची अथवा अन्य चुनावी व्यवस्थाओं को लेकर नियमावली में किए गए कथित बदलावों पर चल रही बहस को भी नया आधार मिल गया है। बार काउंसिल ने अपने आदेश के माध्यम से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि चुनाव प्रक्रिया को मान्य नियमों और निर्धारित वैधानिक व्यवस्था के अनुसार ही आगे बढ़ाया जाए।
एल्डर्स कमेटी को चुनाव कराने का पूरा वैधानिक अधिकार
बार काउंसिल ने रामाशंकर की अध्यक्षता वाली एल्डर्स कमेटी को चुनाव कराने के लिए पूर्णतः वैधानिक निकाय माना है। आदेश के अनुसार चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने, मतदान की नई तिथि तय करने तथा चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी एल्डर्स कमेटी की होगी।
बार काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान कार्यकारिणी को एल्डर्स कमेटी के चुनाव संबंधी कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के आंतरिक विवाद या प्रशासनिक हस्तक्षेप से अलग रखते हुए समयबद्ध तरीके से पूरा कराना बताया गया है।
अब एल्डर्स कमेटी के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी चुनाव की नई तारीख घोषित करने और उससे संबंधित सभी तैयारियों को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने की होगी।
31 अगस्त 2026 से पहले नई मतदान तिथि तय करना अनिवार्य
बार काउंसिल के ताजा आदेश में चुनाव को लेकर स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की गई है। आदेश के अनुसार एल्डर्स कमेटी को 31 अगस्त 2026 से पूर्व नई मतदान तिथि निर्धारित कर चुनाव प्रक्रिया संपन्न करानी है।
इस समयसीमा के बाद चुनाव प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक आगे बढ़ाने की संभावना पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बार काउंसिल के निर्देश से यह संकेत मिलता है कि चुनाव को अब और लंबित रखने के बजाय निर्धारित अवधि के भीतर प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया जा रहा है।
नई मतदान तिथि की घोषणा के बाद नामांकन, जांच, आपत्तियां, अंतिम प्रत्याशी सूची और मतदान से जुड़े अन्य चरणों का कार्यक्रम भी स्पष्ट होने की संभावना है।
17 अगस्त शाम 5 बजे तक मतदाता सूची नहीं मिली तो एल्डर्स कमेटी करेगी फ्रीज
चुनाव प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण विषय मतदाता सूची को लेकर है। बार काउंसिल ने इस संबंध में भी स्पष्ट समयसीमा तय की है।
आदेश के अनुसार यदि अध्यक्ष और महासचिव द्वारा 17 अगस्त 2026 की शाम 5 बजे तक अद्यतन मतदाता सूची एल्डर्स कमेटी को उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो एल्डर्स कमेटी पिछले वर्ष की अंतिम रूप से प्रकाशित मतदाता सूची अथवा बार काउंसिल के पास उपलब्ध COP डेटाबेस के आधार पर मतदाता सूची फ्रीज करने के लिए स्वतंत्र होगी।
इस निर्देश का सीधा प्रभाव चुनाव की तैयारियों पर पड़ सकता है। मतदाता सूची को लेकर किसी भी प्रकार के विवाद के कारण चुनाव प्रक्रिया दोबारा प्रभावित न हो, इसके लिए बार काउंसिल ने वैकल्पिक व्यवस्था भी निर्धारित कर दी है।
इससे यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित पदाधिकारियों पर है, लेकिन निर्धारित समय तक सूची नहीं मिलने की स्थिति में चुनाव प्रक्रिया को रोकने के बजाय एल्डर्स कमेटी उपलब्ध वैधानिक रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ सकती है।

एल्डर्स कमेटी के बैंक खातों पर लगी रोक तत्काल हटाने के निर्देश
बार काउंसिल ने एल्डर्स कमेटी के बैंक खातों के संचालन को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आदेश में खातों पर लगी रोक को तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
संबंधित बैंकों और स्थानीय प्रशासन को भी निर्देशित किया गया है कि एल्डर्स कमेटी को उसके कार्यों के संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन, मतदान व्यवस्था, दस्तावेजों, कर्मचारियों तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए वित्तीय और प्रशासनिक संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में बैंक खातों के संचालन पर लगी रोक हटाने के निर्देश को चुनाव प्रक्रिया को सुचारु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बार भवन और कार्यालय का पूर्ण नियंत्रण एल्डर्स कमेटी को देने के निर्देश
बार काउंसिल ने केवल बैंक खातों के संबंध में ही नहीं, बल्कि बार भवन और कार्यालय के नियंत्रण को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
आदेश में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि एल्डर्स कमेटी को बार भवन और कार्यालय का पूर्ण नियंत्रण दिलाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि चुनाव से संबंधित कार्य बिना किसी रुकावट के संचालित हो सकें।
बार भवन और कार्यालय चुनाव प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण स्थान हैं। यहां मतदाता सूची, नामांकन संबंधी दस्तावेज, चुनावी रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक कार्यों का संचालन किया जाता है। ऐसे में कार्यालय पर नियंत्रण को लेकर उत्पन्न विवाद का चुनाव प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
रजिस्टर्ड डाक लेने से इनकार का भी आदेश में उल्लेख
बार काउंसिल के आदेश में एल्डर्स कमेटी के पत्र दिनांक 8 अगस्त 2026 तथा डाक विभाग की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है।
आदेश के अनुसार डाक विभाग की रिपोर्ट में पत्र प्राप्त करने से इनकार किए जाने की स्थिति सामने आई है। इसके अतिरिक्त आदेश में पत्र संख्या 1666/2026 दिनांक 7 अगस्त 2026 के माध्यम से मतदाता सूची उपलब्ध कराने से मना किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।बार काउंसिल ने इन घटनाक्रमों को गंभीरता से लिया है और चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने वाली परिस्थितियों के रूप में देखा है।
कार्यालय में ताला और खातों का संचालन रोकना गंभीर मामला
बार काउंसिल के आदेश में एल्डर्स कमेटी के खातों का संचालन रोके जाने तथा कार्यालय में ताला लगाए जाने की स्थिति को भी गंभीरता से लिया गया है।
आदेश के अनुसार ऐसी परिस्थितियां चुनाव प्रक्रिया के संचालन में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं। इसी कारण एल्डर्स कमेटी को बार भवन और कार्यालय का पूर्ण नियंत्रण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बार काउंसिल का रुख इस मामले में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि चुनाव प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के प्रशासनिक या आंतरिक विवाद के कारण बाधित नहीं होने दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट के आदेश का भी दिया गया हवाला
बार काउंसिल ने अपने आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट, प्रयागराज के समक्ष हुई न्यायिक कार्यवाही का भी उल्लेख किया है।
आदेश में रिट याचिका संख्या 6613/2026 में 20 मई 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनाव के समय एल्डर्स कमेटी ही चुनाव संपन्न कराने के लिए अधिकृत निकाय है।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्यकारिणी को एल्डर्स कमेटी के पुनर्गठन अथवा उसमें फेरबदल करने का विधिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
बार काउंसिल ने सर्वोच्च न्यायालय के महिला आरक्षण और COP सत्यापन संबंधी आदेशों का भी उल्लेख किया है और कहा है कि इन प्रावधानों की आड़ लेकर नियत समय पर होने वाले चुनाव को टालना उचित नहीं है।
अध्यक्ष और महासचिव पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
बार काउंसिल ने अपने ताजा आदेश में भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी भी जारी की है।
आदेश के अनुसार यदि बार काउंसिल के निर्देशों की दोबारा अवहेलना की जाती है अथवा चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न किया जाता है तो उसे अनुशासनहीनता माना जाएगा।
ऐसी स्थिति में जिला बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता और महासचिव कपिल गुप्ता के विरुद्ध अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 के अंतर्गत पेशेवर कदाचार के संबंध में अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ किए जाने की चेतावनी दी गई है।
यह चेतावनी इस पूरे मामले में बार काउंसिल के सख्त रुख को दर्शाती है।
दोबारा बाधा आने पर बार काउंसिल की संबद्धता समाप्त करने की चेतावनी
ताजा आदेश में सबसे महत्वपूर्ण और कड़ा निर्देश बार एसोसिएशन की संबद्धता को लेकर है।
बार काउंसिल ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव प्रक्रिया में दोबारा किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है या उसके निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो जिला बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, मुरादाबाद की बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से संबद्धता समाप्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
इस चेतावनी के बाद चुनाव से जुड़े सभी पक्षों पर समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का दबाव और बढ़ गया है।
अब चुनाव प्रक्रिया की अगली तस्वीर एल्डर्स कमेटी के हाथ में
बार काउंसिल के आदेश के बाद अब चुनाव की अगली दिशा काफी हद तक एल्डर्स कमेटी की कार्रवाई से तय होगी।
एल्डर्स कमेटी के सामने फिलहाल दो प्रमुख समयसीमाएं हैं। पहली, 17 अगस्त 2026 की शाम 5 बजे तक मतदाता सूची उपलब्ध होने की समयसीमा और दूसरी, 31 अगस्त 2026 से पहले नई मतदान तिथि तय कर चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने का निर्देश।
यदि 17 अगस्त तक अद्यतन मतदाता सूची उपलब्ध नहीं होती है तो एल्डर्स कमेटी पिछले वर्ष की अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची अथवा बार काउंसिल के पास उपलब्ध COP डेटाबेस के आधार पर सूची फ्रीज कर सकती है।
इसके बाद चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने और मतदान कराने की दिशा में प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है।
अधिवक्ताओं की निगाहें अब नई चुनाव तिथि पर
बार काउंसिल के इस आदेश के बाद मुरादाबाद के अधिवक्ताओं के बीच चुनाव को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। लंबे समय से चुनाव की तारीख और मतदाता सूची को लेकर बनी असमंजस की स्थिति अब अगले कुछ दिनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।
संभावित प्रत्याशी भी अब एल्डर्स कमेटी की ओर से जारी होने वाले चुनाव कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं। नई मतदान तिथि घोषित होने के बाद चुनावी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
अधिवक्ता समाज के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे बार एसोसिएशन की आगामी कार्यकारिणी का गठन होगा और आने वाले समय में अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक एवं पेशेवर मुद्दों पर नेतृत्व की भूमिका तय होगी।
चुनाव प्रक्रिया को विवाद से बाहर निकालने की जरूरत
मुरादाबाद बार एसोसिएशन का चुनाव लंबे समय से अधिवक्ता समाज के बीच महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। बार काउंसिल के स्तर से बार-बार निर्देश जारी होने और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवादों के कारण अब सभी पक्षों के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने की है।
किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में चुनाव की विश्वसनीयता केवल मतदान की प्रक्रिया से नहीं, बल्कि मतदाता सूची की पारदर्शिता, प्रत्याशियों के लिए समान अवसर, नियमों के पालन और सभी पक्षों के सहयोग से सुनिश्चित होती है।
ऐसे में बार काउंसिल के ताजा आदेश के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि संबंधित सभी पक्ष न्यायिक और वैधानिक निर्देशों का पालन करते हुए चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे।
सागर और ज्वाला का मत
सागर और ज्वाला न्यूज का मानना है कि मुरादाबाद बार एसोसिएशन का चुनाव किसी व्यक्ति, पद या गुट की प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि पूरे अधिवक्ता समाज की लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
बार की लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति नियमों के पालन, पारदर्शिता, निष्पक्षता और अधिवक्ताओं की सामूहिक भागीदारी में है। चुनाव प्रक्रिया में यदि किसी भी पक्ष की ओर से अनावश्यक हस्तक्षेप या विवाद उत्पन्न होता है तो उसका असर केवल चुनाव पर ही नहीं, बल्कि पूरी संस्था की प्रतिष्ठा पर पड़ता है।
ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में सबसे बेहतर रास्ता यही है कि सभी पक्ष बार काउंसिल के निर्देशों का सम्मान करें, एल्डर्स कमेटी को स्वतंत्र रूप से कार्य करने दें और निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराने में सहयोग करें।
यदि मतदाता सूची समय पर उपलब्ध होती है और चुनाव कार्यक्रम निर्धारित समय में जारी कर दिया जाता है, तो लंबे समय से चले आ रहे विवाद को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है।
अब 17 और 31 अगस्त पर टिकी निगाहें
मुरादाबाद बार चुनाव के पूरे घटनाक्रम में अब 17 अगस्त और 31 अगस्त 2026 दो महत्वपूर्ण तारीखें बन गई हैं।
17 अगस्त 2026 शाम 5 बजे तक मतदाता सूची उपलब्ध कराने की समयसीमा है। इसके बाद सूची उपलब्ध न होने की स्थिति में एल्डर्स कमेटी को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सूची फ्रीज करने की स्वतंत्रता होगी।
वहीं 31 अगस्त 2026 से पहले नई मतदान तिथि निर्धारित कर चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने का निर्देश दिया गया है।
अब देखना यह होगा कि एल्डर्स कमेटी इन दोनों समयसीमाओं के बीच चुनाव कार्यक्रम को किस प्रकार अंतिम रूप देती है और मुरादाबाद बार एसोसिएशन का बहुप्रतीक्षित चुनाव किस तारीख को संपन्न होता है।
— संपादकीय विभाग
सागर और ज्वाला न्यूज, मुरादाबाद







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