जैन धर्म में दीपावली: मोक्ष, केवलज्ञान और आत्मिक ज्योति का दिव्य पर्व
डॉ. पवन कुमार जैन | विशेष लेख – सागर और ज्वाला न्यूज़ पोर्टल
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Toggleदीपावली को जहाँ सामान्यतः धन, समृद्धि और बाह्य प्रकाश का पर्व माना जाता है, वहीं जैन धर्म में यह दिन आत्मिक जागृति, केवलज्ञान और मोक्ष की उपलब्धि से जुड़ा एक महान आध्यात्मिक अवसर है। यह पावन तिथि जैन अनुयायियों के लिए केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्ण प्रकाश का स्मरण दिवस है।
भगवान महावीर का निर्वाण दिवस – दीपावली का मूल आध्यात्मिक संबंध
जैन परंपरा के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान महावीर स्वामी, जो वर्तमान अवसर्पिणी काल के 24वें तीर्थंकर हैं, ने पावापुरी में प्रभात काल (चतुर्दशी-अमावस्या संधिकाल) में मोक्ष प्राप्त किया। उनका यह मोक्ष प्राप्ति क्षण सदा के लिए ‘निर्वाण दिवाली’ बनकर स्थापित हुआ.
गौतम गणधर को इसी दिन मिला केवलज्ञान
भगवान महावीर के प्रथम गणधर गौतम स्वामी को उनके निर्वाण के तुरंत बाद केवलज्ञान की प्राप्ति हुई। यह वह अवस्था है जब आत्मा समस्त पदार्थों के स्वरूप को पूर्ण रूप से जान और देख सकती है। इसलिए यह दिन मोक्ष (महावीर) और केवलज्ञान (गौतम स्वामी) – दोनों का दिव्य संगम है।
पावापुरी की दीपमालिका – देवों ने जगमगाई दिव्य नगरी
महावीर स्वामी के निर्वाण के समय देवों ने संपूर्ण पावापुरी को दीपों की अनगिनत ज्योतियों से आलोकित किया। उसी दिव्य परंपरा की स्मृति में आज भी जैन समाज दीपावली के रूप में दीपमालिका सजाकर इस दिव्य क्षण को जीवन्त करता है।
निर्वाण लड्डू: दर्शन से युक्त दिव्य प्रसाद
जैन मंदिरों में दीपावली पर विशेष रूप से निर्वाण लड्डू चढ़ाया जाता है। यह मात्र प्रसाद नहीं, गहन दर्शन का प्रतीक है—
✅ गोल आकार – आत्मा की अनादि-अनंत स्वरूप का संकेत
✅ बूंदी का तपना – साधना, तप और आत्मशुद्धि की यात्रा
✅ चाशनी का मिलन – मोक्ष रूपी परम आनंद की प्राप्ति
जैसे बूंदी तपकर मधुर लड्डू बनती है, वैसे ही आत्मा तप के माध्यम से मोक्ष का स्वाद चखती है।—
लक्ष्मी और सरस्वती की जैन व्याख्या: भौतिक नहीं, आध्यात्मिक अर्थ
जैन धर्म में लक्ष्मी-सरस्वती की पूजा का अर्थ सांसारिक संपत्ति और विद्या नहीं, बल्कि—
🌼 लक्ष्मी = मोक्ष लक्ष्मी (भगवान महावीर को प्राप्त परम धन)
🌼 सरस्वती = केवलज्ञान सरस्वती (गौतम गणधर को प्राप्त परम ज्ञान)
इस प्रकार दीपावली का वास्तविक संदेश है— आत्मिक समृद्धि और ज्ञान की पूर्णता.
दीपावली की साधना और आचरण जैन दृष्टि से
✔ प्रातःकाल विशेष पूजा एवं निर्वाण लड्डू अर्पण
✔ भगवान महावीर के अंतिम उपदेश का श्रवण
✔ गौतम स्वामी के केवलज्ञान की गाथा का पाठ
✔ रात्रि में दीप प्रज्वलित कर आत्मा के प्रकाश का उत्सव
निष्कर्ष: आत्मज्योति के जागरण का पर्व
जैन दीपावली हमें यह सन्देश देती है कि आत्मा बूंदी की तरह तपेगी तो ही मोक्ष रूपी आनंद का अनुभव कर पाएगी। निर्वाण लड्डू, दीपमालिका, लक्ष्मी-सरस्वती पूजन—ये सब केवल परंपराएँ नहीं, बल्कि आत्मिक मुक्ति के प्रतीक हैं.






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