मुरादाबाद / दिल्ली से सागर और ज्वाला संवाददाता की रिपोर्ट
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Toggleभारती शुक्ला की जिंदादिली ने सबको किया नतमस्तक होने को मजबूर
“जिंदगी को मुस्कराकर जीने वाली एक ऐसी महिला, जिसने मौत को भी जश्न में बदल दिया”
📰 सागर और ज्वाला न्यूज़ विशेष रिपोर्ट
मुरादाबाद की बेटी श्रीमती भारती शुक्ला आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं,
लेकिन उनकी जिंदादिली, हिम्मत और मुस्कान हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।
पेशे से एक टीचर और बीमा एजेंट रहीं भारती शुक्ला का जीवन जितना सादगीभरा था,
उतना ही प्रेरणादायक भी।
🔥 हादसा जिसने सबकुछ बदल दिया
दिल्ली में रह रही भारती का जीवन 1 अक्टूबर की सुबह एक भयानक हादसे से बदल गया।
जब उन्होंने रोज़ की तरह चाय बनाने के लिए गैस जलाई, तो भयंकर सिलेंडर ब्लास्ट ने पूरे घर को हिला दिया।
एसी चलने की वजह से कमरे बंद थे, और धमाका इतना तेज़ था कि खिड़कियाँ और दरवाज़े तक उड़ गए।
उनकी नज़दीकी मित्र रूबी कौर ने बताया कि भारती को 70% तक गंभीर जलन हुई थी।
लेकिन जो बात सभी को हैरान कर गई — वो यह थी कि
भारती उस दर्द में भी घबराईं नहीं, बल्कि उन्होंने एक चादर ओढ़कर
शांति से सीढ़ियों के पास बैठने का निर्णय लिया।
💬 “मैं ठीक हूँ” — भारती का आत्मविश्वास डॉक्टरों को भी चौंका गया
जब पड़ोसी और परिजन उन्हें अस्पताल ले गए,
तो डॉक्टर भी उनके शांत स्वभाव और मुस्कराते चेहरे को देखकर बोले —
“इन्हें तो कुछ नहीं हुआ लगता, ये इतनी नॉर्मल कैसे हैं?”
लेकिन जब बर्न रिपोर्ट आई, तो हर कोई सन्न रह गया —
शरीर का 70 प्रतिशत हिस्सा झुलस चुका था।
इसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स (AIIMS) में रेफर किया गया,
जहां उन्होंने अगले 11 दिनों तक जिंदगी की सबसे कठिन जंग लड़ी —
लेकिन मुस्कराहट कभी नहीं खोई।
💃 वो आखिरी डांस जिसने सबको रुला दिया
एम्स के वार्ड में भारती रोज़ अपने जज्बे से सबको प्रेरित करतीं।
डॉक्टरों, नर्सों और साथी मरीजों के बीच वे “डांसिंग फाइटर” के नाम से मशहूर हो गई थीं।
उन्होंने अपने दर्द को भी डांस और मुस्कान से हराया।
और जब ज़िंदगी की आखिरी घड़ी आई —
वेंटिलेटर पर होते हुए भी उन्होंने डांस करते हुए अपना आखिरी वीडियो रिकॉर्ड करवाया।
उनके आखिरी शब्द थे:
“मैं बहुत खुश हूँ… अब मैं परमात्मा के घर जा रही हूँ।
वहाँ मेरा असली ठिकाना है। कोई रोएगा नहीं, सब खुश रहेंगे।”
🎵 “रोना नहीं, नाचना है” — अंतिम यात्रा बनी उत्सव का प्रतीक
भारती ने अपनी मौत से पहले साफ कहा था कि
उनकी विदाई शोक नहीं, उत्सव के रूप में होनी चाहिए।
उन्होंने परिजनों से कसम ली कि ढोल-नगाड़ों के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाए।
और सचमुच, जब भारती की अंतिम यात्रा निकली,
तो पूरा इलाका गूंज उठा ढोल की थापों, जयघोषों और अश्रुपूर्ण मुस्कानों से।
हर कोई कह रहा था —
“ऐसी जिंदादिल औरत हमने पहली बार देखी है। उसने मौत को भी मात दे दी।”
🌼 प्रेरणा की मिसाल
भारती शुक्ला की कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं,
बल्कि जीवन को मुस्कराकर जीने की कला की कहानी है।
उनकी जिंदादिली, सकारात्मकता और आत्मबल हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है
जो किसी मुश्किल में हिम्मत हार जाता है।
✍️ संपादकीय टिप्पणी – सागर और ज्वाला न्यूज
“भारती शुक्ला ने हमें यह सिखाया कि
जिंदा होना और जिंदादिल होना — दोनों में फर्क होता है।
उन्होंने मौत के सामने भी जिंदगी का जश्न मनाया।
ऐसी आत्मा को शब्दों में नहीं, सलाम में बयां किया जा सकता है।”
🕊️ श्रद्धांजलि
सागर और ज्वाला न्यूज परिवार की ओर से
दिवंगत भारती शुक्ला को भावभीनी श्रद्धांजलि।
“आप गईं नहीं भारती जी, बस अमर हो गईं…”






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