भाजपा की हार क्यों? किसान, नौजवानों बेरोजगारी व राजपूताना सहित अगडे समाज की अनदेखी नेतृत्व व तानाशाही घमंड। योगी ब उनके समर्थको की अनदेखी
रिपोर्ट : सागर और ज्वाला
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किसान, नौजवानों बेरोजगारी व राजपूताना सहित अगडे समाज की अनदेखी नेतृत्व व तानाशाही घमंड योगी ब उनके समर्थको की अनदेखी
अपने संगठन शिल्पी कार्यकर्ता की अनदेखी कर जनाधार विहीन अनुप्रिया पटेल, ओम प्रकास राजभर, डा संजय निषाद, दारा सिह जैसे लोगो पर भरोसा
सागर और ज्वाला न्यूज। भारतीय किसान यूनियन भानु राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिह ने खास इंटरव्यू मे कहा कि भाजपा 25 26 जुलाई को हार पर आत्म मंथन कर रही है उन्होंने क्या कहा जानिए.
सागर और ज्वाला न्यूज।भाजपा राष्ट्रवाद व अंत्योदय के भाव से पल्लवित व पुष्पित पार्टी मानी जाती है।2014 में एक सक्षम व समृद्ध भारत के सृजन हेतु जनता ने भाजपा को सत्तासीन किया।कुछ हद तक लोगों के सपने पूरे भी हुए ।2019 में पूरे संकल्प व विश्वास के साथ फिर से भारतीय जनमानस ने भाजपा को देश की बागडोर सौंप दी।लेकिन धीरे धीरे भाजपा पर संघ की पकड़ कमजोर होने लगी।जिसके कारण नेतृत्व में वेहद तानाशाही,घमंड के भाव आने लगे।संगठन के जिम्मेदार लोगों ने कहा कि स्व पूज्य वाजपेयी जी को संघ की जरूरत थी,हम खड़े हो चुके हैं, हमें स्वतंत्र रूप से चलने दिया जाये परिणाम यह हुआ कि संघ द्वारा पोषित डॉ प्रवीण भाई तोगड़िया व संजय जोशी जैसे कई महान प्रचारक अंधरे के आगोश में खो गये।इतना ही नहीं भाजपा को पौधे से वट व्रक्ष बनाने वाले लालकृष्ण आडवाणी, डॉ मरलीमनोहर जोशी,जसवंत सिंह,सुषमा स्वराज,शंकर सिंह वाघेला,केशुभाई पटेल जैसे समर्पित कर्मठ कार्यकर्ताओ को भी असमय राजनेतिक वनवास दे दिया गया।इसका बहुत गलत संदेश देशभर में गया।मैं देशभक्त व ईमानदार हू , ठीक बात है, लेकिन मैं ही सर्वश्रेष्ठ हू ।इस भाव ने भाजपा को लोगों से दूर कर दिया।लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय,निशुल्क राशन पर निर्भर कर दिया।केंद्र की सत्ता का रास्ता उत्तरप्रदेश से होकर जाता है, यह जानते हुए भी,उत्तरप्रदेश के ईमानदार मुख्यमंत्री योगी जी पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण रखने के लिये नौकरशाही अरविंद शर्मा को उत्तरप्रदेश भेजा गया,जिनका कोई आधार उत्तरप्रदेश में न आज है, और न कल था 2022 में उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए।शुरुआती तीन चरणों तक केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तरप्रदेश के चुनावों में कोई रुचि नहीं ली,जब खुफिया तंत्र ने सूचना दी कि उत्तर प्रदेश में योगी जी फिर से आने वाले हैं, चौथे चरण में माननीय लोगों ने उत्तरप्रदेश में प्रवेश किया।योगी जी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत उत्तरप्रदेश में मिला जो लोग अपनी सीट हार गये उन्हें जबरन स्थापित कर योगी जी पर लगाम कसने की असफल कोशिश की गई जिन लोगों ने योगी जी सहित भाजपा को विधानसभा चुनावों में अमर्यादित गालियां दीं,उनको उत्तरप्रदेश में अपने अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप के लिए फिर से भाजपा में लाया गया जिस उद्देश्य के लिये दारा सिंह चौहान व ओमप्रकाश राजभर ,आशीष पटेल, अनुप्रिया पटेल, डॉ संजय निषाद व अन्य को लाया गया,क्या उस उद्देश्य की पूर्ति हुई? केंद्रीय नेतृत्व को तो केवल योगी जी को अपमानित करना था पूरे उत्तरप्रदेश में इसका नकारात्मक सन्देश गया।जो तत्वनिष्ठ कार्यकर्ता थे,उन्हें नजरअंदाज किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी जी कहते थे, कि भाजपा का एक भी पुराना कार्यकर्ता नहीं टूटना चाहिए, बेशक नया टूट जाए ,पुराना कार्यकर्ता भाजपा की विजय की गारंटी होता है।इस कहावत को भी दर किनार कर दिया गया।राजस्थान,मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में जिन लोगों के कारण भाजपा वापस सत्ता में आयी, डॉ रमन सिह ,नरेन्द्र सिह , तोमर शिवराज सिह व बसुन्धरा राजे उनकी राजनैतिक हत्या कर दी गई देश भर में इसका बहुत गलत संदेश गया यदि इन प्रदेशों में भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के कारण सत्ता में लौटी,तो लोकसभा चुनावों में क्या हो गया।वाराणसी के निकट अधिकांश सीटें भाजपा क्यों हार गई विशेषकर उत्तरप्रदेश के अंदर कई केंद्रीय मंत्रियों व सासंदो का प्रबल विरोध था, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व की निकटता के कारण उनका टिकिट नहीं बदला गया।जिन लोगों को योगी जी लड़ाना चाह रहे थे,उन्हें नजरअंदाज किया गया।समय समय पर योगी जी को बदलने के संदेशों ने लोगों को भी भृमित कर दिया।2022 के विधानसभा चुनावों में कई सांसदों ने भाजपा के विरुद्ध काम किया,उन पर कोई कार्यवाही नही हुई, बल्कि उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकिट देकर सम्मानित किया गया।लोकसभा चुनाव में ऐसे सांसदों का विधायक विरोध नही करेंगे,यह कैसे सम्भव है।ऐसे लोगों का टिकिट काट दिया,जो 2019 में 5 लाख से अधिक वोटों से जीते थे।जबकि गुजरात के अंदर भाजपा के जिम्मेदार लोगों ने जाति विशेष की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं,लेकिन उनका टिकिट नहीं कटा, तब महिला सशक्तीकरण का नारा कहाँ चला गया था। परिणाम स्वरूप देश का क्षत्रिय समाज नाराज हो गया।श्रीराम मंदिर विध्वंश के बाद अयोध्या के निकट के 105 गांवों के क्षत्रियों ने 500 वर्षो तक पगड़ी नहीं पहनी,राम मंदिर के पुनः निर्माण की प्रतीक्षा की,मंदिर के ट्रस्ट में क्षत्रियों का प्रतिनिधित्व शून्य,और न ही इन गांवों के प्रमुख क्षत्रियों को प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया।उत्तरप्रदेश के अंदर भाजपा की हार का यह बड़ा कारण है।ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य भाजपा की कैडर वोट है, लेकिन इनके साथ भी न्याय नहीं हुआ।पिछड़ों को स्थापित करना अच्छी बात है, लेकिन कैडर की अवहेलना करना ठीक नही।इन वर्गों से जो पुराने भाजपाई थे,वे आज भी उपेक्षित हैं, जो अन्य दलों से आये,वे सत्तासीन हैं।यह भी भाजपा की हार का कारण बना।केजरीवाल न अपने चुनावी भाषणों में कहा था कि अमित शाह के अगले शिकार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी होंगे,भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इसका खंडन क्यों नहीं किया,इसका बड़ा प्रभाव लोकसभा चुनाव पर पड़ा। देश में पहली बार इस लोकसभा चुनाव में संघ की कोई भूमिका नहीं दिखी,जबकि संघ भाजपा का पालक है। संघ व भाजपा में कहीं समन्वय नहीं दिखाई पड़ा । यह भी भाजपा की हार का एक प्रमुख कारण रहा है।इस पर चिंतन होना चाहिए।हार जीत लोकतंत्र का हिस्सा है,यह चलता रहता है।विपक्षी कल भी दिशाहीन थे,आज भी हैं।उनका कोई विजन नही हैं।भाजपा को देश हित में निष्पक्ष होकर स्व मूल्यांकन करना चाहिए।जो इस चुनाव में दोषी हैं, उन्हें देश हित में आडवाणी जी की तरह मार्गदर्शक मंडल में चले जाना चाहिए वार्ता मे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कालीचरण चतुर्वेदी व संगठन राष्ट्रीय प्रवक्ता राघवेन्द्र सिह राजू की भी खास मौजूदगी रही.
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