उपभोक्ता आयोग के आदेश की अवहेलना पर लकी ड्रॉ संचालक गिरफ्तार, डेढ़ माह से जेल में बंद
संभल में बचत योजना के नाम पर ग्रामीणों से लाखों रुपये जमा कराने का मामला, एक उपभोक्ता की शिकायत पर हुई कार्रवाई
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Toggleजिला उपभोक्ता आयोग ने 36 हजार रुपये, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति व वाद व्यय देने का दिया था आदेश
आदेश का पालन नहीं करने पर जारी हुआ गैर-जमानती वारंट, थाना बनियाठेर पुलिस ने गिरफ्तार कर आयोग में किया पेश
संभल। बचत योजना और लकी ड्रॉ के नाम पर लोगों से धनराशि जमा कराने तथा समय पूरा होने के बाद रकम वापस नहीं करने के मामलों में उपभोक्ताओं के सामने आर्थिक नुकसान के साथ-साथ न्याय पाने की चुनौती भी खड़ी हो जाती है। ऐसा ही एक मामला संभल जिले में सामने आया है, जहां एक लकी ड्रॉ संचालक को जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं करने के मामले में गिरफ्तार किया गया। संचालक को 19 अगस्त 2026 को जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष पेश किया गया था। इसके बाद उसे जिला कारागार मुरादाबाद भेज दिया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वह लगभग डेढ़ माह से जेल में निरुद्ध है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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यह मामला गांव मंझावली, तहसील चंदौसी निवासी जितेंद्र कुमार पुत्र रामपाल उर्फ रामसिंह की ओर से संचालित ‘नसीब अपना अपना न्यू सैनी लकी ड्रॉ’ नामक बचत योजना से जुड़ा है। योजना में धनराशि जमा कराने वाले एक उपभोक्ता ने निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद रकम वापस नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था। आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद संचालक को जमा धनराशि का निर्धारित हिस्सा ब्याज सहित लौटाने और उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय देने का आदेश दिया था।
300 सदस्यों के साथ शुरू की गई थी लकी ड्रॉ योजना
उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के अनुसार, जितेंद्र कुमार ने गांववासियों को जोड़कर ‘नसीब अपना अपना न्यू सैनी लकी ड्रॉ’ नाम से एक बचत योजना शुरू की थी। योजना के तहत लोगों को बताया गया था कि इसमें कुल 300 सदस्य होंगे और ड्रॉ की अवधि 40 माह निर्धारित की गई है।
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योजना से जुड़े लोगों को यह जानकारी दी गई थी कि निर्धारित अवधि पूरी होने पर प्रत्येक सदस्य को बाइक दी जाएगी। यदि किसी सदस्य को बाइक नहीं मिलती है, तो उसकी जमा धनराशि में से 1,200 रुपये काटकर शेष रकम वापस कर दी जाएगी। इस व्यवस्था के आधार पर ग्रामीणों ने योजना में अपनी-अपनी धनराशि जमा कराई।
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बताया गया है कि कामेश गिरी उर्फ भूरे गिरी ने भी इस लकी ड्रॉ योजना में कुल 39,100 रुपये जमा कराए थे। योजना की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जब जमा धनराशि लौटाने का समय आया, तो आरोप है कि संचालक ने अपना कार्यालय बंद कर दिया और रकम वापस नहीं की। इससे संबंधित उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा और उसे अपनी धनराशि प्राप्त करने के लिए कानूनी रास्ता अपनाना पड़ा।
रुपये वापस नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग में पहुंचा मामला
योजना की अवधि पूरी होने के बाद भी रकम वापस नहीं मिलने पर उपभोक्ता ने अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। इस मामले में अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की गई।
परिवाद में जमा धनराशि वापस दिलाने के साथ-साथ ब्याज और आर्थिक नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति की मांग की गई। मामले पर विचार करने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने 14 जून 2023 को लकी ड्रॉ संचालक को आदेश दिया कि वह दो माह के भीतर 36,000 रुपये और उस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करे। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता को 15,000 रुपये क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय के रूप में अदा करने का भी निर्देश दिया गया।
इस प्रकार आयोग के आदेश में उपभोक्ता को आर्थिक राहत देने के लिए मूल धनराशि, ब्याज और क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय का भुगतान करने की जिम्मेदारी तय की गई थी। हालांकि, अधिवक्ता के अनुसार, संचालक ने निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया और उपभोक्ता को भुगतान नहीं मिल सका।
आदेश का पालन नहीं होने पर जारी हुआ गैर-जमानती वारंट
जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के बावजूद निर्धारित धनराशि का भुगतान नहीं किए जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की गई। आयोग की ओर से लकी ड्रॉ संचालक के विरुद्ध गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए।
इसके अनुपालन में थाना बनियाठेर पुलिस ने जितेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उन्हें 19 अगस्त 2026 को जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष पेश किया। इसके बाद आदेश के अनुपालन से जुड़े मामले में उन्हें जिला कारागार मुरादाबाद भेज दिया गया।
प्राप्त विवरण के अनुसार, संचालक लगभग डेढ़ माह से जेल में बंद है। मामले में आगे की कार्रवाई जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष लंबित बताई गई है। आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने के कारण संचालक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है।
गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए उच्च न्यायालय में याचिका
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बताया गया है कि लकी ड्रॉ संचालक जितेंद्र कुमार ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की है।
इस याचिका पर क्या आदेश हुआ है, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। इसलिए गिरफ्तारी की वैधता और याचिका के परिणाम के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस संबंध में आगे की स्थिति न्यायालय के आदेश और मामले के आधिकारिक अभिलेखों से स्पष्ट होगी।
वहीं, जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के अनुपालन का प्रश्न अपनी जगह बना हुआ है। आयोग की ओर से निर्धारित धनराशि का भुगतान नहीं होने के कारण उपभोक्ता को लंबे समय तक अपनी रकम के लिए कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 का प्रावधान
अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 में उपभोक्ता आयोग के आदेश का पालन नहीं करने की स्थिति में दंड का प्रावधान है। उनके बताए विवरण के अनुसार, इस धारा के अंतर्गत एक माह से तीन वर्ष तक के कारावास तथा 25 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान लागू हो सकता है।
हालांकि, किसी मामले में वास्तविक दंड का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रावधानों, मामले के तथ्यों और सक्षम आयोग के आदेश के आधार पर होता है। इस प्रकरण में अंतिम सजा सुनाए जाने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
अधिवक्ता का कहना है कि आदेश के अनुसार लगभग 55 हजार रुपये की राशि और उस पर निर्धारित ब्याज का भुगतान करने के बजाय संचालक कानूनी मुकदमेबाजी में धन खर्च कर रहा है। उनके अनुसार, आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने से उपभोक्ता को राहत मिलने में देरी हो रही है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है इस मामले का संदेश?
यह मामला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो बचत योजना, लकी ड्रॉ या अन्य निजी योजनाओं में अपनी मेहनत की कमाई जमा कराते हैं। किसी भी योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी शर्तों, संचालक की विश्वसनीयता, भुगतान की प्रक्रिया और लिखित दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है।
धनराशि जमा करते समय रसीद, बैंक लेनदेन का प्रमाण, सदस्यता संबंधी दस्तावेज, योजना की शर्तें और संचालक के साथ हुआ लिखित पत्राचार सुरक्षित रखना चाहिए। यदि निर्धारित समय पर भुगतान नहीं होता है, तो संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर उपयुक्त कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।
उपभोक्ता आयोग में शिकायत करना उन परिस्थितियों में एक कानूनी विकल्प हो सकता है, जहां मामला उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में आता हो। आयोग द्वारा आदेश पारित किए जाने के बाद उसके अनुपालन और आदेश की कानूनी स्थिति का महत्व भी उतना ही है।
संभल का यह प्रकरण एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि बचत योजना में निवेश करने से पहले सावधानी बरतना और अपने लेनदेन का प्रमाण सुरक्षित रखना आवश्यक है। साथ ही, उपभोक्ता को राहत दिलाने के लिए उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी होना भी महत्वपूर्ण है।
देवेंद्र वार्ष्णेय
उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता
नोट: यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी और अधिवक्ता के कथन पर आधारित है। प्रकाशन से पहले संबंधित जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश, गिरफ्तारी एवं जेल में निरुद्ध होने की वर्तमान स्थिति, उच्च न्यायालय में दायर याचिका और धारा 72 के अंतर्गत दंड के सटीक प्रावधानों की पुष्टि कर लें।







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