सत्ता की लालच में ,मानवता को किया शर्मसार
सौरभ मिश्र (उप संपादक),सागर और ज्वाला न्यूज
चंदौसी , सागर और ज्वाला न्यूज दिनांक 19 मार्च 2024 दिन मंगलवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक दिल को दहलाने वाली घटना हुई । इस घटना ने मानवता और आपसी विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा दिया । सूत्रों के अनुसार हेयर सैलून चलाने वाले दो मुस्लिम युवक उनकी दुकान के नजदीक रहने वाले एक हिंदू परिवर के घर पहुंचते हैं जहां मकान की मालकिन हिंदू महिला उनका आदर सत्कार करते हुए उनको बैठक में बिठाकर उनके लिए चाय बनाने के लिए जाती है इसी बीच वह दोनों मुस्लिम युवक उस महिला के दो पुत्र 6 वर्षीय व 13 वर्षीय को छत पर ले जाते हैं और उस्तरे से उनका गला काट देते हैं जब महिला चाय तैयार कर बैठक में पहुंचती है और अपने बच्चों को और उन दोनों दरिंदों को वहां नहीं पाती है तो वह छत पर जाती है जहां वह देखती है कि पूरी छत पर हर तरफ खून ही खून बिखरा है और दोनो हत्यारे युवक पिशाचों की भांति मृत बच्चो के खून को पीने का प्रयास कर रहे हैं यह देखकर महिला डर के कारण कांपने लगती है और जोर से चिल्लाती है जिसको सुनकर दोनों नर पिशाच वहां से भाग खड़े होते हैं इस घटना का पता चलते ही घटना स्थल पर हजारों लोग इकट्ठे हो जाते हैं और इस विभत्स हत्याकांड के विरोध में मुस्लिम युवकों के हेयर सैलून को आग लगा देते हैं और जुलूस के रूप में क्षेत्रीय थाने में पहुंच कर आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग करते हैं। हिंदू- मुस्लिम समुदाय से मामला संबंधित होने के कारण पुलिस तत्परता दिखाती है और 3 घंटे बाद ही दो आरोपियों में से एक आरोपी पुलिस से मुठभेड़ के दौरान जंगल में मारा जाता है । इस मुठभेड़ में पुलिस का एक दरोगा भी बुरी तरह से घायल हो जाता है ऐसी वीभत्स घटना होने पर भी राजनीतिक दल मृतक परिवार के प्रति सहानुभूति दर्शाने के स्थान पर राजनीतिक रोटियां सेंकना प्रारंभ कर देते हैं और आरोप प्रत्यारोप का एक वेशर्म खेल प्रारंभ हो जाता है
जहां समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव उत्तर प्रदेश की वर्तमान योगी सरकार पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए वर्तमान समय में कानून व्यवस्था को पूरी तरह से विफल बताते हैं और इस घटना को भाजपा द्वारा रचित घटना कहकर लोगों की भावनाएं भड़काने का प्रयास करते हैं।
वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से बदायूं की वर्तमान सांसद एवं भाजपा नेता डॉ संघमित्रा मौर्य पलट बार करते हुए इस सारी घटना की जिम्मेदारी विरोधी पार्टियों पर डालते हुए कहती हैं कि आगामी चुनाव में हिंदू- मुस्लिम कार्ड को खेल कर विपक्षी दल ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने के सपने देख रहे हैं ।
पर सवाल यह उठता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में सरकार किसी की भी बने क्या एक मानव होने के नाते मासूम बच्चों के साथ हुई इस दिल दहला देने वाली घटना की इन राजनीतिक दलों के नेताओं को निंदा नहीं करनी चाहिए साथ ही साथ इस घटना में लिप्त फरार आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग नहीं करनी चाहिए? इस घटना के बाद जिस तरह की राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही है
उसको देखकर कहीं ना कहीं लगता है कि वर्तमान परिपेक्ष में कुर्सी मानवता से ऊपर दर्जा प्राप्त कर चुकी है और यह राजनीतिक दल सत्ता पाने के लिए आम जनता की भावनाओं के साथ खुलकर खिलवाड़ कर सकते हैं ऐसे में एक आम नागरिक होने के नाते हमें यह सोचना होगा कि सत्ता के इन लोभी नेताओं के कुप्रयासो को पहचानकर शांति एवम सौहार्द को कायम रखने का प्रयास करना चाहिए। और घटना किसी भी धर्म या संप्रदाय से संबंधित हो एक मानव होने के हमे पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा होना चाहिए और किसी भी घटना के जिम्मेदार लोगो के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।


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