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सावन का चतुर्थ एवं अंतिम सोमवार: मुरादाबाद से हरिद्वार और बृजघाट की ओर उमड़ा आस्था का सैलाब

सावन का चतुर्थ एवं अंतिम सोमवार: मुरादाबाद से हरिद्वार और बृजघाट की ओर उमड़ा आस्था का सैलाब

लाखों शिवभक्त कांवड़ लेकर रवाना, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे मार्ग; प्रशासन पूरी तरह अलर्ट, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था चाक-चौबंद

सागर और ज्वाला न्यूज | धर्म एवं विशेष संवाददाता

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मुरादाबाद। पवित्र श्रावण मास अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और सावन के चतुर्थ एवं अंतिम सोमवार को लेकर शिवभक्तों में विशेष उत्साह और आस्था का वातावरण बना हुआ है। भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए हरिद्वार, बृजघाट और अन्य पवित्र गंगाघाटों से गंगाजल लेने वाले कांवड़ियों और श्रद्धालुओं का आवागमन लगातार तेज हो रहा है। मुरादाबाद से होकर गुजरने वाले प्रमुख कांवड़ मार्गों पर रविवार से ही श्रद्धालुओं की टोलियां दिखाई देने लगी हैं।

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कंधों पर सजी रंग-बिरंगी कांवड़, हाथों में भगवा ध्वज, माथे पर भस्म और मुख पर भगवान शिव का नाम लिए श्रद्धालु अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। मार्गों पर जगह-जगह हर-हर महादेव, बम-बम भोले और ॐ नमः शिवाय के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है।

नोट: वर्ष 2026 में सावन का चतुर्थ एवं अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 को है। अंतिम सोमवार से पहले कांवड़ियों की वापसी और गंगाजल लेकर अपने-अपने स्थानीय शिवालयों की ओर जाने का क्रम तेजी से बढ़ रहा है।

रविवार से ही शुरू हुआ कांवड़ियों का जनसैलाब

सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले ही हरिद्वार और बृजघाट की ओर रवाना हो चुके हैं। रविवार से मुरादाबाद की सड़कों पर कांवड़ियों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखने को मिल रही है।

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मुरादाबाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग होने के कारण कांवड़ यात्रा के दौरान इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले कांवड़िए मुरादाबाद होकर अमरोहा, रामपुर, संभल, बरेली और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों की ओर जाते हैं। वहीं बृजघाट से जल लेने वाले श्रद्धालु भी मुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों के शिवालयों की ओर लौटते हैं।

जैसे-जैसे अंतिम सोमवार नजदीक आता है, कांवड़ियों की संख्या बढ़ती जाती है और मार्गों पर भगवा रंग की कांवड़ों का दृश्य लोगों का ध्यान आकर्षित करता है।

मुरादाबाद बना कांवड़ यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव

कांवड़ यात्रा के दौरान मुरादाबाद केवल आवागमन का मार्ग नहीं रहता, बल्कि यह श्रद्धालुओं की सेवा और स्वागत का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन जाता है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह कांवड़ियों के लिए भंडारे, जलपान केंद्र, चिकित्सा शिविर और विश्राम स्थल बनाए जाते हैं।

स्थानीय लोग भी श्रद्धालुओं की सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। कहीं कांवड़ियों को भोजन कराया जा रहा है तो कहीं पानी, दूध, फल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

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इस सेवा भावना से कांवड़ यात्रा का धार्मिक स्वरूप सामाजिक समरसता और मानव सेवा से भी जुड़ जाता है।

प्रशासन पूरी तरह अलर्ट, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

अंतिम सोमवार को संभावित भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कांवड़ मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती, बैरियर, यातायात नियंत्रण, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और प्रमुख शिवालयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रशासन द्वारा कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

अधिकारियों की प्राथमिकता है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और आम नागरिकों का आवागमन भी यथासंभव सुचारु बना रहे।

दिल्ली रोड से कांठ रोड तक यातायात पर विशेष निगरानी

कांवड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए मुरादाबाद में प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था में आवश्यक परिवर्तन किए जाते हैं। दिल्ली रोड हाईवे, कांठ रोड और अन्य कांवड़ मार्गों पर भारी वाहनों के संचालन को नियंत्रित करने तथा आवश्यकता के अनुसार डायवर्जन लागू करने की व्यवस्था की गई है।

कांवड़ियों की संख्या बढ़ने पर छोटे वाहनों, ऑटो और ई-रिक्शा के संचालन को भी निर्धारित मार्गों तक सीमित किया जा सकता है।

आम वाहन चालकों से अपील है कि वे प्रशासन द्वारा जारी यातायात निर्देशों और डायवर्जन का पालन करें। कांवड़ मार्ग पर अनावश्यक वाहन लेकर जाने से बचें और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

हरिद्वार की ओर बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

कांवड़ यात्रा का प्रमुख केंद्र हरिद्वार है। गंगा तट पर गंगाजल लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

अंतिम सोमवार से पहले हरिद्वार में गंगा स्नान और जल भरने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसके बाद कांवड़िए अपने-अपने गंतव्य की ओर पैदल यात्रा शुरू करते हैं।

हरिद्वार से लेकर मुरादाबाद तक कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक निगरानी रखी जा रही है।

बृजघाट भी बना आस्था का प्रमुख केंद्र

हरिद्वार के साथ-साथ बृजघाट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शिवभक्तों के लिए गंगाजल लेने का प्रमुख केंद्र है। मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, हापुड़, मेरठ तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बृजघाट पहुंचते हैं।

गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु कांवड़ में गंगाजल लेकर अपने गांव, कस्बे और शहरों की ओर लौटते हैं। अंतिम सोमवार से पहले बृजघाट में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है, जिसके चलते घाटों और आसपास के मार्गों पर भीड़ प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है।

कांवड़ियों की सेवा में जगह-जगह भंडारे और शिविर

कांवड़ यात्रा भारतीय समाज की सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है। मार्ग में जगह-जगह सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा कांवड़ियों के लिए भंडारे और सेवा शिविर लगाए जाते हैं।

इन शिविरों में भोजन, पानी, शरबत, फल, दूध, चाय, चिकित्सा सुविधा और विश्राम की व्यवस्था की जाती है। कई स्थानों पर प्राथमिक उपचार के लिए चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था भी की जाती है।

कांवड़ियों की सेवा करने वाले लोग इसे भगवान शिव की सेवा का ही एक रूप मानते हैं।

कांवड़ यात्रा में दिखाई देती है सामाजिक एकता

कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग की मिसाल भी है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक बड़ी संख्या में लोग श्रद्धालुओं के स्वागत और सेवा के लिए आगे आते हैं।

कांवड़ियों की यात्रा में अनुशासन, संयम, त्याग और परस्पर सहयोग का विशेष महत्व दिखाई देता है। कठिन मौसम और लंबी दूरी के बावजूद श्रद्धालु अपने संकल्प से पीछे नहीं हटते।

आखिर क्यों विशेष है सावन का अंतिम सोमवार?

सनातन परंपरा में श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। पूरे सावन में शिव आराधना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत, मंत्रजप और दान-पुण्य की विशेष परंपरा है।

अंतिम सोमवार इस साधना का विशेष अवसर माना जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव के समक्ष परिवार की सुख-शांति, आरोग्य, समृद्धि, संतान सुख, वैवाहिक सुख और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

कई श्रद्धालु पूरे सावन के दौरान किए गए व्रत और पूजा का समापन अंतिम सोमवार को विशेष पूजन और रुद्राभिषेक के साथ करते हैं।

जलाभिषेक की परंपरा और समुद्र मंथन की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कालकूट विष निकला था। इस विष के प्रभाव से समस्त सृष्टि के विनाश का संकट उत्पन्न हो गया। तब भगवान शिव ने लोककल्याण के लिए विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और नीलकंठ कहलाए।

विष की उष्णता को शांत करने के लिए भगवान शिव पर जल अर्पित करने की परंपरा से जलाभिषेक की धार्मिक मान्यता जुड़ी मानी जाती है।

इसी श्रद्धा के साथ कांवड़िए गंगा से पवित्र जल लेकर अपने क्षेत्र के शिवालयों तक पहुंचते हैं और सावन के सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

क्यों प्रिय है भगवान शिव को बेलपत्र?

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। बेलपत्र की तीन पत्तियों को त्रिनेत्र, त्रिदेव और विभिन्न आध्यात्मिक शक्तियों का प्रतीक माना जाता है।

श्रद्धालु शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद बेलपत्र, धतूरा और आक के पुष्प अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव निष्कपट भक्ति और सच्चे भाव से शीघ्र प्रसन्न होते हैं, इसी कारण उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है।

कांवड़ यात्रा है आस्था, अनुशासन और संकल्प की यात्रा

कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हैं। गर्मी, उमस, बारिश, थकान और भीड़ जैसी चुनौतियों के बावजूद उनके कदम लगातार आगे बढ़ते हैं।

कांवड़िए अपने कंधों पर गंगाजल लेकर चलते हैं और इस दौरान अनेक श्रद्धालु नियम, संयम और सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं। उनके लिए यह यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण और संकल्प की यात्रा है।

मुरादाबाद में हर ओर शिवभक्ति का वातावरण

अंतिम सोमवार से पहले मुरादाबाद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में शिवभक्ति का माहौल दिखाई देने लगा है। बाजारों में कांवड़, भगवा ध्वज, शिव प्रतिमाएं और पूजा सामग्री उपलब्ध हैं।

शिवालयों में भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर समितियों द्वारा श्रद्धालुओं की कतार, जलाभिषेक, प्रसाद वितरण और भीड़ नियंत्रण के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

कांवड़ियों की टोलियां जब शहर और ग्रामीण मार्गों से गुजरती हैं तो हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंज उठता है।

शिवालयों में उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब

अंतिम सोमवार को सुबह से ही मुरादाबाद और आसपास के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। अनेक मंदिरों में भोर से ही जलाभिषेक और पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है।

श्रद्धालु भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे। कई स्थानों पर रुद्राभिषेक, शिव महिमा पाठ, महामृत्युंजय मंत्र जाप और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाएंगे।

प्रशासन की श्रद्धालुओं से अपील

पुलिस और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि कांवड़ यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें और निर्धारित कांवड़ मार्ग का ही प्रयोग करें।

श्रद्धालु यातायात नियमों का पालन करें, अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस या प्रशासन को दें।

आम नागरिकों से भी अपील है कि कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखें और प्रशासन द्वारा लागू किए गए यातायात परिवर्तनों में सहयोग करें।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण भी बने शिवभक्ति का हिस्सा

भगवान शिव का स्वरूप प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। गंगा, हिमालय, वनस्पति, नंदी और अनेक प्राकृतिक प्रतीक भगवान शिव की आराधना से जुड़े हैं।

इसलिए सावन के अवसर पर श्रद्धालुओं को गंगा और अन्य जलस्रोतों को स्वच्छ रखने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करने का संकल्प लेना चाहिए।

भगवान शिव की सच्ची आराधना केवल मंदिर में पूजा करने तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज की रक्षा करने में भी दिखाई देनी चाहिए।

शिव का संदेश है त्याग, सेवा और लोककल्याण

भगवान शिव का संपूर्ण स्वरूप त्याग, तपस्या, करुणा और लोककल्याण का संदेश देता है। समुद्र मंथन से निकले विष को स्वयं धारण कर उन्होंने संसार की रक्षा की।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि वास्तविक शक्ति वही है जिसका उपयोग दूसरों के कल्याण के लिए किया जाए। आज के समय में शिव का संदेश नशामुक्ति, आत्मसंयम, सेवा, करुणा, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण के रूप में भी प्रासंगिक है।

अंतिम सोमवार पर हर ओर गूंजेगा हर-हर महादेव

सावन के चतुर्थ एवं अंतिम सोमवार पर मुरादाबाद से लेकर हरिद्वार और बृजघाट तक आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगे और अपने स्थानीय शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे।

कंधों पर सजी कांवड़, हाथों में भगवा ध्वज, पैरों में यात्रा की थकान और हृदय में महादेव के प्रति अटूट श्रद्धा इस यात्रा को अद्भुत बना देती है।

यह केवल कांवड़ की यात्रा नहीं, बल्कि विश्वास, संकल्प, सेवा, अनुशासन और समर्पण की यात्रा है।

सावन के अंतिम सोमवार का संदेश

सावन का अंतिम सोमवार हमें यह संदेश देता है कि जीवन में केवल भौतिक सुख ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। सेवा, संयम, करुणा, सत्य, त्याग और मानवता भी जीवन की वास्तविक संपदा हैं।

यदि भगवान शिव की आराधना के साथ हम किसी जरूरतमंद की सहायता करें, किसी भूखे को भोजन दें, किसी प्यासे को पानी पिलाएं, किसी पेड़ को बचाएं और समाज में प्रेम एवं सद्भाव बढ़ाएं, तो यही शिवभक्ति का वास्तविक स्वरूप होगा।

सागर और ज्वाला परिवार की ओर से शुभकामनाएं

सावन के चतुर्थ एवं अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर सागर और ज्वाला परिवार सभी शिवभक्तों, कांवड़ियों, श्रद्धालुओं और देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता है।

भगवान भोलेनाथ सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य, समृद्धि और सद्बुद्धि प्रदान करें। समाज में भाईचारा, सद्भाव और सेवा की भावना मजबूत हो तथा देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।

हर-हर महादेव।

ॐ नमः शिवाय।

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