आंजनेय सिंह के ‘एक्सटेंशन’ पर लगा ब्रेक! 11 साल बाद UP से विदाई की तैयारी, मुरादाबाद कमिश्नर का चार्ज DM राजेंद्र पेंसिया के हाथ
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय से चर्चा का केंद्र रहे 2005 बैच के IAS अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह को इस बार उत्तर प्रदेश में आगे का सेवा विस्तार नहीं मिला है। उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि 14 अगस्त 2026 को समाप्त हो गई, जिसके बाद उन्होंने मुरादाबाद मंडलायुक्त का पदभार छोड़ दिया और दो महीने के अवकाश पर चले गए। उनके स्थान पर फिलहाल मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया को मंडलायुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
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आंजनेय कुमार सिंह के मामले में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह उत्तर प्रदेश में करीब 11 वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे थे और इससे पहले उन्हें लगातार सात बार प्रतिनियुक्ति विस्तार मिल चुका था। इस बार आठवें विस्तार का इंतजार था, लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद फिलहाल उन्हें नया विस्तार नहीं मिला है।
11 साल से UP में थे तैनात, अब खत्म हुई प्रतिनियुक्ति
आंजनेय कुमार सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन उनकी IAS सेवा का मूल कैडर सिक्किम है। वर्ष 2015 में वह उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर आए थे।
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इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह बुलंदशहर, फतेहपुर और रामपुर के जिलाधिकारी रहे। बाद में उन्हें पदोन्नति के बाद मुरादाबाद मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया।
उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि कई बार बढ़ाई गई। वर्ष 2025 में केंद्र सरकार ने उन्हें सातवां सेवा विस्तार देते हुए अगस्त 2026 तक उत्तर प्रदेश में रहने की अनुमति दी थी।
लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग रही।
14 अगस्त 2026 को प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें आठवां विस्तार नहीं मिला और उन्होंने मंडलायुक्त का चार्ज छोड़ दिया।
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मुरादाबाद DM डॉ. राजेंद्र पेंसिया के पास आया कमिश्नर का अतिरिक्त चार्ज
आंजनेय कुमार सिंह के अवकाश पर जाने के बाद मुरादाबाद मंडलायुक्त का अतिरिक्त प्रभार मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया को सौंपा गया है। शासन की ओर से नए मंडलायुक्त की नियमित नियुक्ति होने तक वह अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल मुरादाबाद मंडलायुक्त का पद स्थायी रूप से भरा नहीं गया है, बल्कि प्रशासनिक कामकाज को सुचारु रखने के लिए DM को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
मंडलायुक्त के रूप में आंजनेय सिंह का लंबा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन इस पद पर किस अधिकारी की नियमित तैनाती करता है।
क्या आंजनेय सिंह अब हमेशा के लिए UP से बाहर जाएंगे?
फिलहाल इसका जवाब पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
उनका मूल कैडर सिक्किम है और उत्तर प्रदेश में उनकी प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में सामान्य स्थिति में उन्हें अपने मूल कैडर में वापस जाना पड़ सकता है।
हालांकि, उनकी कहानी में इससे पहले भी ऐसा मोड़ आ चुका है।
पिछले वर्ष भी उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के बाद कुछ समय के लिए उन्हें पद से रिलीव किया गया था और बाद में केंद्र से सातवां विस्तार मिलने के बाद वह फिर उत्तर प्रदेश में बने रहे थे। इसी वजह से इस बार भी प्रशासनिक हलकों में उनके संभावित आठवें विस्तार को लेकर चर्चाएं चलती रही हैं।
फिलहाल 17 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें नया सेवा विस्तार नहीं मिला है।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि आंजनेय सिंह की उत्तर प्रदेश में वापसी पूरी तरह समाप्त हो गई है। अंतिम तस्वीर केंद्र और राज्य सरकार के अगले आदेशों से ही साफ होगी।
रामपुर में आजम खान से टकराव ने दिलाई देशभर में पहचान
आंजनेय कुमार सिंह के प्रशासनिक करियर की बात हो और आजम खान प्रकरण का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है।
वर्ष 2019 में आंजनेय कुमार सिंह रामपुर के जिलाधिकारी थे। इसी दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और जिला प्रशासन के बीच कई मामलों को लेकर टकराव सामने आया।
आजम खान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई और उनके राजनीतिक प्रभाव वाले रामपुर में प्रशासन की सख्ती के कारण आंजनेय कुमार सिंह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गए।
मीडिया रिपोर्टों में उन्हें आजम खान के खिलाफ कार्रवाई करने वाले प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों में गिना गया।
‘तनखैया’ टिप्पणी वाला मामला फिर 2026 में क्यों आया चर्चा में?
दिलचस्प बात यह है कि करीब सात साल पुराना रामपुर का यह विवाद 2026 में एक बार फिर सुर्खियों में आ गया।
2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने तत्कालीन रामपुर DM समेत सरकारी अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसी मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चला।
16 मई 2026 को रामपुर की MP-MLA स्पेशल कोर्ट ने आजम खान को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष की सजा सुनाई। अदालत ने जुर्माना भी लगाया।
इसके बाद आजम खान ने इस फैसले के खिलाफ अपील की।
लेकिन 18 जुलाई 2026 को सेशन कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा को बरकरार रखा।
यानी जिस अधिकारी के साथ 2019 के चुनावी दौर में आजम खान का विवाद हुआ था, उसी प्रकरण का कानूनी असर 2026 में भी दिखाई देता रहा।
आजम खान और आंजनेय सिंह की कहानी में यह मामला क्यों अहम है?
यह प्रकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आंजनेय कुमार सिंह की सार्वजनिक छवि पर रामपुर का कार्यकाल गहरा प्रभाव डालने वाला रहा।
रामपुर में वह ऐसे समय DM थे जब आजम खान जिले की राजनीति में बेहद प्रभावशाली नेता थे। प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी के बीच दोनों के बीच विवाद काफी बढ़ा।
बाद में यही विवाद अदालत तक पहुंचा और वर्षों बाद 2026 में आजम खान को इस मामले में दो साल की सजा हुई। जुलाई 2026 में अपील खारिज होने के बाद यह मामला फिर राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की खबरों में आया।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आजम खान को सजा अदालत के फैसले के आधार पर मिली है; इसे केवल आंजनेय सिंह के प्रशासनिक कार्यकाल का परिणाम बताना उचित नहीं होगा।
बुलंदशहर से रामपुर और फिर मुरादाबाद तक का सफर
उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति के दौरान आंजनेय कुमार सिंह ने कई महत्वपूर्ण जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली।
बुलंदशहर: जिलाधिकारी के रूप में तैनाती।
फतेहपुर: जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी।
रामपुर: जिलाधिकारी रहते हुए आजम खान प्रकरण के कारण राष्ट्रीय चर्चा में आए।
मुरादाबाद: मार्च 2021 में मंडलायुक्त बने और लंबे समय तक इस पद पर रहे।
इस तरह उनका करियर केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़ा रहा।
12वीं में 49 प्रतिशत, फिर UPSC में हासिल की टॉप रैंक
आंजनेय कुमार सिंह की कहानी का एक और पहलू उन्हें युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच खास बनाता है।
मीडिया में उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने इंटरमीडिएट में 49 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी और BHU से शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्होंने पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन से जुड़ी पढ़ाई तथा कार्य का अनुभव भी हासिल किया।
इसके बाद उन्होंने UPSC Civil Services Examination में सफलता हासिल की और उपलब्ध प्रोफाइल स्रोतों के अनुसार All India Rank 29 प्राप्त की।
वर्ष 2005 में वह IAS अधिकारी बने और उन्हें सिक्किम कैडर मिला।
यानी उनकी कहानी का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है—
इंटर में 49 प्रतिशत अंक → UPSC में AIR 29 → IAS → सिक्किम कैडर → UP में 11 साल की प्रतिनियुक्ति → कई जिलों की कमान → मुरादाबाद मंडलायुक्त।
सात एक्सटेंशन के बाद आठवें पर क्यों टिकी थीं निगाहें?
आंजनेय सिंह के मामले में आठवें विस्तार को लेकर इसलिए भी काफी चर्चा थी क्योंकि इससे पहले उनकी प्रतिनियुक्ति लगातार बढ़ाई जाती रही थी।
2025 में सातवें विस्तार के बाद उनकी UP में तैनाती अगस्त 2026 तक तय हुई थी। इसलिए जैसे-जैसे अगस्त 2026 नजदीक आया, प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या उन्हें एक बार फिर उत्तर प्रदेश में बनाए रखा जाएगा।
लेकिन इस बार 14 अगस्त की निर्धारित तारीख आने के बाद नया विस्तार सामने नहीं आया।
उन्होंने पदभार छोड़ दिया और अवकाश पर चले गए।
यही वजह है कि इस घटनाक्रम को सामान्य प्रशासनिक तबादले के बजाय आंजनेय सिंह के लंबे UP कार्यकाल के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
अब मुरादाबाद की कमान किसके पास और आगे क्या?
फिलहाल मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया के पास मंडलायुक्त का अतिरिक्त प्रभार है।
आने वाले दिनों में शासन की ओर से मुरादाबाद मंडल के लिए नए नियमित मंडलायुक्त की नियुक्ति की जा सकती है। वहीं दूसरी ओर आंजनेय कुमार सिंह के मामले में भी यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने मूल सिक्किम कैडर में लौटते हैं या उत्तर प्रदेश में उनकी वापसी का कोई रास्ता बनता है।
17 अगस्त 2026 तक सबसे स्पष्ट स्थिति यही है कि उन्हें आठवां सेवा विस्तार नहीं मिला है, उन्होंने मुरादाबाद मंडलायुक्त का चार्ज छोड़ दिया है और फिलहाल डॉ. राजेंद्र पेंसिया अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।
आंजनेय कुमार सिंह: एक नजर में
IAS बैच: 2005
मूल कैडर: सिक्किम
UP में प्रतिनियुक्ति: 2015 से
प्रमुख जिलों की जिम्मेदारी: बुलंदशहर, फतेहपुर और रामपुर
चर्चित कार्यकाल: रामपुर DM, 2019
मुरादाबाद मंडलायुक्त: 2021 से
UP प्रतिनियुक्ति विस्तार: सात बार
अंतिम निर्धारित अवधि: 14 अगस्त 2026
वर्तमान स्थिति: प्रतिनियुक्ति समाप्त, अवकाश पर
मुरादाबाद कमिश्नर का अतिरिक्त चार्ज: DM डॉ. राजेंद्र पेंसिया
सबसे चर्चित प्रकरण: रामपुर में आजम खान से जुड़ा प्रशासनिक और कानूनी विवाद
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह आंजनेय सिंह की UP में 11 साल लंबी पारी का अंत है, या आठवें एक्सटेंशन के साथ कहानी में फिर आएगा नया मोड़?
फिलहाल जवाब सरकार के अगले आदेश पर टिका है।






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