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आरएसएस के प्रति अमर्यादित भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध : डॉ. पवन कुमार जैन

आरएसएस के प्रति अमर्यादित भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध : डॉ. पवन कुमार जैन

आरएसएस पर आपत्तिजनक बयान सस्ती राजनीति का उदाहरण : डॉ. पवन जैन


राष्ट्रसेवा में समर्पित संगठन के प्रति अपमानजनक भाषा अस्वीकार्य

मुरादाबाद। सामाजिक कार्यकर्ता एवं बाबू मुकुट बिहारी लाल जैन सेवा न्यास के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार जैन ने एक बयान जारी करते हुए देश की वर्तमान राजनीतिक भाषा शैली पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कुछ नेताओं द्वारा दिए जा रहे वक्तव्य न केवल उनकी मानसिक संकीर्णता को दर्शाते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा को भी ठेस पहुँचाते हैं।


राजनीतिक बयानबाजी पर कड़ी आपत्ति

डॉ. जैन ने विशेष रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना साँप से करने तथा मुरादाबाद की सांसद द्वारा उसे “नासूर” कहने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भाषा न केवल अनुचित है, बल्कि समाज में अनावश्यक वैमनस्य फैलाने वाली भी है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत या संगठनात्मक अपमान में बदलना लोकतंत्र की आत्मा के विरुद्ध है।


लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा बनाए रखने की अपील

डॉ. जैन ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है और यह स्वस्थ बहस का हिस्सा भी है। किन्तु, अमर्यादित एवं अपमानजनक भाषा का प्रयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे अपने वक्तव्यों में संयम बरतें और समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करें।


इतिहास के संदर्भ में आरएसएस की भूमिका

उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर कई बार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया, किन्तु हर बार न्यायपालिका और समाज ने उन निर्णयों को असंगत और अनुचित ठहराया।
डॉ. जैन के अनुसार, यह तथ्य दर्शाता है कि संघ की जड़ें समाज में गहराई तक जुड़ी हुई हैं और उसका कार्य व्यापक स्तर पर स्वीकार किया जाता है।


वैश्विक स्तर पर संघ का विस्तार

डॉ. जैन ने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, जिसकी गतिविधियाँ 40 से अधिक देशों में संचालित हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि संघ की विचारधारा और उसके कार्यों से प्रेरित लोग विश्व के अनेक देशों में सक्रिय हैं और विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यों में योगदान दे रहे हैं।


सस्ती राजनीति से ऊपर उठने की जरूरत

डॉ. जैन ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस प्रकार के बयान केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास हैं, जो न तो देश के हित में हैं और न ही लोकतंत्र के लिए लाभकारी।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि सभी राजनीतिक दल रचनात्मक राजनीति करें और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सहयोग दें।


समाज में सौहार्द और सम्मान बनाए रखने का आह्वान

अंत में डॉ. पवन कुमार जैन ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे ऐसे विवादास्पद बयानों से प्रभावित न हों और आपसी भाईचारे, सौहार्द एवं सम्मान की भावना को बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और सभी को मिलकर देश की प्रगति के लिए कार्य करना चाहिए।


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