Search
Close this search box.

मुरादाबाद: एनसीईआरटी लागू कराने में प्रशासन सख्त, फिर भी निजी किताबों को लेकर अभिभावकों की चिंता बरकरार

मुरादाबाद: एनसीईआरटी लागू कराने में प्रशासन सख्त, फिर भी निजी किताबों को लेकर अभिभावकों की चिंता बरकरार

मुरादाबाद। जिले में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और किफायती बनाने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा सख्त रुख अपनाया गया है। मंडलायुक्त, जिलाधिकारी (DM) और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की सक्रियता, साथ ही “पेरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल” संगठन के निरंतर प्रयासों और मीडिया द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद, जिले के कई निजी विद्यालयों को अंततः कक्षा 1 से 5 तक एनसीईआरटी (NCERT) की पुस्तकों को लागू करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।

यह निर्णय उन निजी स्कूलों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो अब तक महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें लागू कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालते रहे हैं। लंबे समय से अभिभावक इस मुद्दे को लेकर असंतोष जता रहे थे, जिसके बाद यह प्रशासनिक हस्तक्षेप संभव हो पाया।


सामूहिक प्रयासों का दिखा असर

प्रशासनिक सख्ती, जनदबाव और संगठनों की सक्रिय भूमिका के परिणामस्वरूप अब शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

  • कई निजी विद्यालयों ने कक्षा 1 से 5 तक एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को लागू करना शुरू कर दिया है।
  • अभिभावकों को उम्मीद जगी है कि अब बच्चों की शिक्षा का खर्च कुछ हद तक कम होगा।
  • शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और समानता की दिशा में यह एक सकारात्मक और आवश्यक कदम माना जा रहा है।

इस उपलब्धि के लिए अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी, DIOS तथा मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया है।


फिर भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई समस्या

हालांकि प्रशासनिक आदेशों के बाद स्थिति में सुधार देखने को मिला है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई अनियमितताएं अब भी सामने आ रही हैं, जो इस प्रयास की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं।

  • कई विद्यालयों ने एनसीईआरटी की पुस्तकों के साथ-साथ उन्हीं विषयों की निजी प्रकाशकों की अतिरिक्त किताबें भी अनिवार्य कर दी हैं।
  • कुछ स्कूलों में निजी किताबों की संख्या एनसीईआरटी पुस्तकों से कहीं अधिक बताई जा रही है।
  • उदाहरण के तौर पर, जहां 7 एनसीईआरटी किताबें निर्धारित हैं, वहां 15 से 18 तक निजी किताबें भी सूची में शामिल की जा रही हैं।

इस स्थिति के कारण अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होने के बजाय कई मामलों में और अधिक बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे उनकी चिंता बनी हुई है।


सरकारी निर्देश क्या कहते हैं

प्रशासन द्वारा जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों में निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है:

  • कक्षा 1 से 5 तक 100 प्रतिशत एनसीईआरटी की पुस्तकों का ही उपयोग अनिवार्य होगा।
  • केवल उन्हीं विषयों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई जा सकती हैं, जहां एनसीईआरटी की पुस्तक उपलब्ध नहीं है।
  • यदि किसी विषय में अतिरिक्त पुस्तक आवश्यक समझी जाती है, तो इसके लिए अभिभावक समिति की पूर्व सहमति अनिवार्य होगी।
  • निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की कीमत एनसीईआरटी के समान या उसके आसपास होनी चाहिए, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।

इन निर्देशों का उद्देश्य शिक्षा को सुलभ, समान और आर्थिक रूप से संतुलित बनाना है।


अभिभावकों की मांग: सख्ती से हो नियमों का पालन

अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि जारी किए गए आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है।

  • नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर आर्थिक दंड लगाया जाए।
  • जिला स्तर पर नियमित निरीक्षण और निगरानी की ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
  • अभिभावकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए।

अभिभावकों का मानना है कि यदि इन बिंदुओं पर गंभीरता से अमल किया जाए, तो शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव है।


निष्कर्ष

मुरादाबाद में एनसीईआरटी लागू करने की दिशा में उठाया गया यह कदम शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, किफायती और न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि, इसका पूर्ण प्रभाव तभी देखने को मिलेगा जब प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी और सख्ती बनाए रखी जाएगी।

वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां शेष हैं। यदि इन चुनौतियों का समाधान समय रहते किया जाता है, तो आने वाले समय में अभिभावकों को वास्तविक राहत मिल सकेगी और शिक्षा व्यवस्था अधिक संतुलित एवं विश्वसनीय बन पाएगी।

Leave a Comment