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जीवनसाथी का सम्मान: शिकायत नहीं, विश्वास से बनता है मजबूत रिश्ता — नीरज सोलंकी, एडवोकेट

जीवनसाथी का सम्मान: शिकायत नहीं, विश्वास से बनता है मजबूत रिश्ता

— नीरज सोलंकी, एडवोकेट

आज के समय में एक चिंताजनक प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। कई बार पति या पत्नी अपने वैवाहिक मतभेदों को सुलझाने के बजाय बाहरी लोगों से सहानुभूति प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह आदत धीरे-धीरे रिश्ते की जड़ों को कमजोर कर देती है।

वैवाहिक जीवन केवल साथ रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह विश्वास, सम्मान, गोपनीयता और भावनात्मक सुरक्षा का रिश्ता है। जब जीवनसाथी की शिकायतें दूसरों के सामने बार-बार रखी जाती हैं, तो इससे न केवल रिश्ते की गरिमा प्रभावित होती है, बल्कि आपसी विश्वास भी टूटने लगता है।


सहानुभूति की तलाश या रिश्ते से दूरी?

कई बार लोग अपनी परेशानियों को साझा करने के नाम पर दूसरों के सामने अपने जीवनसाथी की गलत छवि प्रस्तुत करने लगते हैं।

  • पत्नी अगर बार-बार दूसरों के सामने खुद को पति-पीड़ित बताती है
  • या पति दूसरों के सामने खुद को पत्नी-पीड़ित दिखाता है

तो यह व्यवहार समस्या का समाधान नहीं करता, बल्कि रिश्ते में दूरी बढ़ाता है।

बाहरी सहानुभूति कुछ समय के लिए भावनात्मक राहत दे सकती है, लेकिन यह वैवाहिक जीवन में गलतफहमियों, अविश्वास और तनाव को बढ़ा देती है।


क्यों जरूरी है रिश्ते की गोपनीयता?

हर दांपत्य जीवन में मतभेद होते हैं। यह स्वाभाविक है। लेकिन समझदारी इस बात में है कि—

  • समस्याओं को आपस में बैठकर सुलझाया जाए
  • परिवार या काउंसलर जैसी जिम्मेदार और भरोसेमंद मदद ली जाए
  • अनावश्यक रूप से मित्रों, सोशल मीडिया या बाहरी लोगों के बीच निजी बातें न फैलाई जाएं

रिश्ते की गोपनीयता ही उसकी मजबूती की पहली शर्त होती है।


जीवनसाथी ही सबसे बड़ा सहारा

जीवन की कठिन परिस्थितियों में अंततः वही व्यक्ति साथ खड़ा रहता है, जिसके साथ आपने जीवन बिताने का निर्णय लिया है।

समाज, मित्र और परिचित समय के साथ बदल जाते हैं, लेकिन सच्चा जीवनसाथी ही आपके सुख-दुख का स्थायी साथी होता है।

इसलिए समय रहते अपने जीवनसाथी की भावनाओं को समझना, उनकी कद्र करना और उनके साथ संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।


रिश्ते बचाने के लिए क्या करें?

  • शिकायत नहीं, संवाद करें
  • एक-दूसरे की बात धैर्य से सुनें
  • गुस्से में दूसरों के सामने साथी की बुराई न करें
  • सोशल मीडिया पर निजी जीवन को सार्वजनिक करने से बचें
  • जरूरत हो तो मैरिज काउंसलिंग लें

निष्कर्ष

वैवाहिक जीवन प्रतिस्पर्धा या सहानुभूति पाने का माध्यम नहीं, बल्कि साझेदारी और विश्वास का संबंध है।

दूसरों से सहानुभूति पाने की आदत रिश्ते को कमजोर करती है, जबकि आपसी समझ और सम्मान उसे मजबूत बनाते हैं।

जीवनसाथी की कीमत समय रहते पहचानें, क्योंकि वही आपका सच्चा और स्थायी साथी है।


Author:

नीरज सोलंकी, एडवोकेट
(सामाजिक एवं पारिवारिक विषयों के विश्लेषक)

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