भाई दूज: प्रेम, सुरक्षा और विश्वास की अमर कहानी
- भाई दूज – रिश्तों की रोशनी और चार कहानियाँ जो दिल छू लेंगी
- जब तिलक बनता है जीवनभर की रक्षा का वचन
- बहन की दुआ और भाई का संकल्प
- एक त्योहार जो केवल रीति नहीं, भावना है – भाई दूज की गाथा
प्रस्तावना
दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम को समर्पित होता है – भाई दूज। यह त्योहार केवल तिलक की रस्म नहीं, बल्कि रिश्तों का पुनर्समर्पण और बहन की दुआ एवं भाई के रक्षा-संकल्प का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक करती है और उसके दीर्घायु जीवन की प्रार्थना करती है। बदले में भाई जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देता है।
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Toggleपौराणिक कथा – यमराज और यमुना का पवित्र स्नेह
किंवदंती के अनुसार सूर्यदेव की संतान यमराज और यमुना लंबे समय बाद मिले। यमुना ने भाई का स्वागत तिलक कर, भोजन कराकर किया। प्रसन्न होकर यमराज ने कहा —
“जो भी बहन इस दिन अपने भाई को तिलक करेगी, उसके भाई को यम का भय नहीं रहेगा।”
तभी से यह दिन “यम द्वितीया” के नाम से जाना जाने लगा।
कहानी (A): बचपन में बिछड़े भाई-बहन का मिलन
राजू और गीता अनाथालय में पले। गरीबी और परिस्थितियों ने उन्हें अलग कर दिया। बरसों बाद एक सामाजिक संस्था की मदद से वे भाई दूज के दिन मिले।
गीता ने कांपते हाथों से तिलक लगाया और रोते हुए बोली —
“भैया! अब कभी मत जाना।”
राजू ने भावुक होकर कहा —
“अब तुम्हारी रक्षा मेरा जीवन है।”
यह कहानी बताती है कि भाई दूज केवल खून से रिश्ते नहीं, दिल से जुड़े रिश्तों को भी जोड़ती है।
कहानी (B): बहन की प्रेरणा से भाई का सफल होना
आदित्य पढ़ाई में कमजोर था और कई बार असफल होकर हार मान चुका था। उसकी बहन परी हर भाई दूज पर कहती —
“मेरा तिलक सिर्फ रंग नहीं, तुम्हारी जीत की शुरुआत है।”
प्रेरित होकर आदित्य ने मेहनत की और एक दिन एक बड़े अधिकारी के रूप में सफल हुआ।
उसने बहन को तिलक वाले दिन कहा —
“मेरी जीत, तुम्हारी दुआ का परिणाम है।”
कहानी (C): बहन ने भाई को बुरी संगत से बचाया
अंशुल गलत संगत में जा चुका था। परिवार असहाय था। भाई दूज पर उसकी बहन रुचि ने उसे तिलक करते हुए कहा —
“यह तिलक रक्षा का नहीं, चेतावनी का है। तुम बदलोगे, तभी मैं तुम्हें गर्व से ‘भैया’ कहूंगी।”
भाई ने अपनी गलती सुधारी और आज वह एक सफल उद्यमी है।
कहानी (D): गाँव की बहन का बलिदान
सीमा के भाई दीपक को बाहर पढ़ाई का मौका मिला, लेकिन पैसे की कमी थी। भाई दूज पर सीमा ने अपनी कलाई में पहना चांदी का कड़ा बेच दिया। दीपक की पढ़ाई पूरी हुई और उसने बहन के नाम से स्कूल खोला — “सीमा शक्ति विद्यालय।”
यह कहानी बताती है —
“कभी-कभी बहन रक्षा बंधन की राखी नहीं, भाई के जीवन की ढाल बन जाती है।”
त्योहार की रस्में और परंपराएं
| क्रम | परंपरा | भावनात्मक अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | तिलक | दीर्घायु और सुरक्षा का आशीर्वाद |
| 2 | आरती | नकारात्मकता से रक्षा |
| 3 | मिठाई | रिश्तों की मधुरता |
| 4 | उपहार | सम्मान और कृतज्ञता |
भारत में विभिन्न रूप
| क्षेत्र | नाम | विशेषता |
|---|---|---|
| उत्तर भारत | भाई दूज | रोली-चावल तिलक |
| बंगाल | भाई फोटा | विशेष मंत्रोच्चार |
| महाराष्ट्र | भाऊबीज | बहन द्वारा भोजन |
| नेपाल | भाई टीका | सप्तरंगी तिलक |
संदेश
भाई दूज हमें याद दिलाता है —
- बहन केवल राखी का धागा नहीं, जीवनभर की भावना है।
- भाई केवल सुरक्षा नहीं, विश्वास का स्तंभ है।
- दूरी चाहे जितनी हो, यह त्योहार रिश्तों को फिर जोड़ देता है।
समापन
भाई दूज प्रेम का दीप है, दुआ का तिलक है और विश्वास की अग्नि है जो हर रिश्ते को उजाला देती है।
भाई दूज की हार्दिक शुभकामनाएं
“बहन की दुआओं से बढ़कर कोई कवच नहीं,
और भाई के वचन से पवित्र कोई व्रत नहीं।
भाई दूज की अनंत शुभकामनाएं…”
— सागर और ज्वाला न्यूज़






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