गाजियाबाद में वकीलों की हड़ताल खत्म: जिला जज कि कोर्ट का बहिष्कार जारी, क्या तीन हफ्तों में सुलझेगा विवाद ?
मुख्य न्यायाधीश ने हड़ताल समाप्त होने के बाद कार्यवाही का आश्वासन दिया। इस भरोसे के आधार पर गाजियाबाद बार ने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। इसके बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई।
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Toggleरिपोर्ट :रूद्र प्रताप सिंह (सह
गाजियाबाद में अधिवक्ताओं की लंबे समय से जारी हड़ताल समाप्त हो गई है और मंगलवार से कचहरी में कामकाज शुरू हो जाएगा। वकील जिला जज को हटाए जाने तक उनकी कोर्ट का बहिष्कार करेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ वार्ता के बाद हड़ताल को तीन सप्ताह के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। 29 अक्टूबर की घटना के बाद से वकील आंदोलनरत थे।
कचहरी में मंगलवार को अधिवक्ता अपना काम शुरू करेंगे। जिला जज कोर्ट में 29 अक्टूबर को वकीलों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में चल रही हड़ताल सोमवार को हंगामे के बाद खत्म हो गई। बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से बातचीत के बाद हड़ताल वापसी पर सहमति जताई। अधिकांश जिलों की बार एसोसिएशन ने आंदोलन को तीन सप्ताह के लिए स्थगित करने पर सहमति दी। हालांकि, अधिवक्ता जिला जज को हटाए जाने तक उनकी कोर्ट का बहिष्कार करेंगे।
वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। सोमवार को बार सभागार के बाहर वकीलों ने धरना दिया। शाम को धरना स्थल छोड़ने के बाद बार एसोसिएशन ने हड़ताल समाप्त कर आंदोलन तीन सप्ताह के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव का विरोध करने के लिए कई अधिवक्ता बार सभागार पहुंचे और विरोध जताया।
मुख्य न्यायाधीश से वार्ता
बार अध्यक्ष दीपक शर्मा ने कहा कि 14 नवंबर को गाजियाबादसे वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल लखनऊ प्रशासनिक न्यायमूर्ति से इस मिलकर चर्चा की। इसके बाद शुक्रवार को वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिला। मुख्य न्यायाधीश ने हड़ताल समाप्त होने के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस भरोसे के आधार पर गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। इसके बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई।
29 अक्टूबर की घटना
29 अक्टूबर को जिला जज और वरिष्ठ अधिवक्ता नाहर सिंह यादव के बीच बहस के बाद विवाद बढ़ गया था। एक जमानत याचिका पर प्राथमिकता से सुनवाई की मांग को लेकर हुई इस बहस के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने वकीलों को न्यायालय कक्ष खाली करने को कहा, लेकिन वकीलों के मना करने पर बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना के बाद वकील जिला जज को बर्खास्त करने और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए थे।
हड़ताल का प्रभाव
गाजियाबाद की अदालतों में 4,00,538 केस लंबित हैं। डेढ़ लाख से अधिक मामलों में हड़ताल के कारण नई तारीख लग गई। हर दिन करीब 10,000 मामलों की सुनवाई कचहरी में होती है, लेकिन हड़ताल के चलते इन मामलों में भी देरी हुई। बार एसोसिएशन ने न्यायिक अधिकारियों से अनुरोध किया है कि मंगलवार और बुधवार को अगर कोई वकील कोर्ट में उपस्थित न हो, तो प्रतिकूल आदेश पारित न किए जाएं।
आगे की स्थिति
वकीलों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी मांगें पूरी न होने पर वे फिर से आंदोलन करेंगे। फिलहाल, तीन सप्ताह के लिए आंदोलन स्थगित कर दिया गया है। कचहरी में कामकाज शुरू होने से न्याय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।


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