Search
Close this search box.

शंकराचार्य का बड़ा बयान जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली

“क्यों जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली ज़रूरी? शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के दृष्टिकोण से”

 

शंकराचार्य का बड़ा बयान जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मानना है कि अनुच्छेद 370 केवल एक संवैधानिक प्रावधान नहीं था, बल्कि जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान को सुरक्षा प्रदान करता था। अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था, जो वहां के नागरिकों को कई विशेष अधिकार प्रदान करता था और राज्य की विशिष्ट संस्कृति की रक्षा करता था। शंकराचार्य का कहना है कि अनुच्छेद 370 का हटना राज्य के सांस्कृतिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा रहा है और स्थानीय कानूनों में भी कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं।

 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, अनुच्छेद 370 ने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने में मदद की थी। इसके हटने के बाद, रणबीर पेनल कोड जैसे विशेष स्थानीय कानून निष्क्रिय हो गए, जो गायों की रक्षा से संबंधित थे और वहां के धार्मिक मान्यताओं को प्रतिबिंबित करते थे। वह मानते हैं कि इस कदम से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक मान्यताओं पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 की बहाली के बिना, राज्य में सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक आस्थाएं सुरक्षित नहीं रहेंगी।

 

शंकराचार्य का कहना है कि भारतीय संविधान में निहित मूल्य, विशेष रूप से हिंदू धर्म के अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों से मेल खाते हैं। उनका मानना है कि अनुच्छेद 370 एक ऐसा पुल था जो इस सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सहायक था। अब, अनुच्छेद 370 की अनुपस्थिति में, जम्मू-कश्मीर की संस्कृति को बाहरी प्रभावों से खतरा महसूस हो रहा है। स्वामीजी इस बहाली को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं, क्योंकि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को पुनर्स्थापित करने का एक तरीका है।

 

शंकराचार्य ने इस विषय में विस्तार से कहा कि अनुच्छेद 370 केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं था, बल्कि एक ऐसा ढांचा था जो स्थानीय कानूनों और परंपराओं को राष्ट्रीय धारा में समाहित करता था। उनका मानना है कि अनुच्छेद 370 की बहाली से जम्मू-कश्मीर में धार्मिक और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और यह क्षेत्र के लोगों को उनकी विशिष्ट पहचान की सुरक्षा प्रदान करेगा।

 

उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में ऐसे प्रावधान महत्वपूर्ण हैं जो क्षेत्रीय विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित कर सकें।

Leave a Comment