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मुरादाबाद में पशुपालन विभाग के संरक्षण में पल रहे डेरी मालिक ।पशु पालन विभाग के अधिकारी खा रहे मलाई।

मुरादाबाद में पशुपालन विभाग के संरक्षण में पल रहे डेरी मालिक पशु विभाग के अधिकारी खा रहे मलाई।

पशुपालन विभाग में पशुओ पर लगने वाले टैग के हाथ मे दे दिए जाते थे

मुरादाबाद सागर और ज्वाला न्यूज। विकासनगर में एक बीमार गाय की सूचना पर हुआ बड़ा खुलासा क्षेत्र वासियों की माने तो कुछ दिन पहले ही डेरी मलिक ने अपनी एक गाय को बाहर निकाल कर खड़ा कर दिया आज जब वह चलने फिरने में असमर्थ हुई तो क्षेत्र वासियों ने अनुराग मिश्रा की सूचना पर श्री गौ माता सेवा ट्रस्ट के सचिव सचिन सक्सेना को जानकारी प्राप्त हुई सूचना मिलते ही ट्रस्ट के सचिव सचिन सक्सेना मौके पर पहुंचे तो इलाज के लिए डॉक्टर की व्यवस्था कराई उसके बाद मलिक से बात करने के लिए संबंधित चौकी राम तलैया को सूचना दी गई सूचना पर तत्काल पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस मे हेड कांस्टेबल जगपाल सिंह ,कांस्टेबल अंकित पवार मौके पर पहुंचे और डेयरी मालिक को भी मौके पर बुलवाया पता चला की डेरी मालिक सुबह को दूध निकालने के बाद डेरी को बंद कर चला जाता है और फिर शाम को आकर डेरी खोलता है पूरे दिन गाय धूप में खड़ी रहती है

इसके बाद जब डेरी में जाकर देखा तो एक पतली सी पन्नी के नीचे गाय और भैंस बंधी हुई थी गोबर की चारों ओर गंदगी पड़ी थी एक भैंस का बच्चा बिल्कुल धूप में बैठा था गाय भी सब धूप में तप रही थी गाय मालिक वाजिद पुत्र हमीद निवासी जयन्तीपुर से पूछने पर गाय मालिक ने गायों की संख्या और भैंस की संख्या सही नहीं बताइए डेयरी मालिक 5 गाय 4 भैस बता रहा था इस पर जब देखा तो 6 गाय 1 गाय का बच्चा, 4 भैस , और 3 भैंसों के बच्चे मौके पर थे सब के सब धूप में थे तभी डेरी मालिक ने खुलासा करते हुए संख्या पर बताया कि मेरे पास टैग (छल्ला) है जो कि पशुपालन विभाग बालो ने डिब्बे में रखने को दिए हैं। जबकि कानून यह टैग गायों के कानों पर हि डॉक्टर को लगाने होते है जिसके लिए सरकार द्वारा एक निर्धारित शुल्क भी टैग डालने का दिया जाता है। इसमें बड़ा सवाल यह उठता है कि सरकारी धनराशि का दुरुपयोग कर टैग डालने के बजाय डेयरी मालिकों के हाथ में पशु पालन विभाग ने इतनी मात्रा में क्यों दे दिए जिससे यह डेरी मालिक क्या करते है कि अपनी गाय को बीमार होने पर सड़क पर छोड़ देते हैं। और उसकी जगह दूसरी गाय लाकर डेरी पर खड़ी कर देते हैं। और वो टैग नई गायों को लगा देते हैं इस पर सदर अस्पताल के डॉक्टर जितेंद्र से बात की गई तो कहा कि अस्पताल में आकर बैठकर बात करो जबकि ट्रस्ट के पदाधिकारी ने कहा कि आप मौके पर आकर या अपने किसी अधीनस्थ को भेजिए जिससे हमारी बात की पुष्टि की जा सके पर डॉक्टर साहब अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए मीटिंग में होने का बहाना कर तथा स्टाफ न होने की बात कह कर टाल मटोल कर दिया। ट्रस्ट ने इस पूरे मामले की जानकारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी व निदेशक पशुपालन विभाग को दी निर्देशक महोदय के द्वारा शाम तक निस्तारण करने की बात कही इससे स्पष्ट होता है कि पता नहीं कितनी ही डेरी पर इस तरह का गोरखधंधा फल फूल रहा होगा यह जॉच का विषय है।

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