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कितने वेद पुराणों का ज्ञान है सूरज पाल को ? यह किस परंपरा से है? कौन हैं इसके गुरु?

कितने वेद पुराणों का ज्ञान है सूरज पाल को ? यह किस परंपरा से है? कौन हैं इसके गुरु ?

प्रशासन की ओर से कंट्रोल रूम/हेल्पलाइन नंबर 05722-227041, 42, 43, 45 भी जारी किया गया है

रिपोर्ट,  मुरादाबाद संवाददाता ।

हाथरस,सागर और ज्वाला न्यूज।हाथरस मामले में दिलचस्प बात ये भी है कि कथित भोले बाबा अपने भक्तों से कोई दान, दक्षिणा या चढ़ावा नहीं लेता है लेकिन उसके बावजूद उसके कई स्थानों पर आश्रम स्थापित हो चुके है

उत्तर प्रदेश के अलावा भी कई दूसरे स्थानों पर स्वामित्व वाली जमीन पर आश्रम स्थापित होने कि जानकारी मिली है पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बाबा के पास कई एकड़ जमीन पर आश्रम हैं उन्ही आश्रम पर सत्संग के कार्यक्रम चलते रहते हैं सूरज पाल के साथ अधिकांश लोग अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी वर्ग से हैं।

अपने आप को स्वंयभू बताने वाले भोले बाबा’ पहले आगरा के एक छोटे से मकान में निवास करते थे बताते हैं कि अब उस मकान में ताला लगा रहता है उस मकान को बाबा की कुटिया कहा जाता हैं।लेकिन आसपास के लोगों की मानें तो ये बाबा का ये रेस्ट हाउस है जहां पर बाबा अक्सर आते जाते रहते और आराम करते हैं

बाबा के कोइ औलाद ना होने से ट्रस्ट को दी सारी सम्पत्ति।

बताया जाता हैं कि सूरज पाल के कोइ औलाद नहीं होने की वजह से सूरजपाल सिंह जाटव ने 24 मई 2023 को अपनी सारी संपत्ति नारायण विश्व हरि ट्रस्ट के नाम कर दी थी भक्तों के मुताबिक जब बाबा भोले अपने भक्तो को प्रवचन देते हैं तो उनकी बराबर वाली कुर्सी पर बैठी महिला उनकी पत्नी नहीं बल्कि उनकी मामी बैठती हैं जबकि उनकी मामी ने कभी प्रवचन नहीं किया

बाबा ने अब तक बड़े ही रहस्यमयी तरीके से अपने साम्राज्य को चलाते आ रहे हैं नारायण साकार पायजामा कुर्ता, पैंट-शर्ट और सूट तक में नजर आते अपने प्रवचनों में सफेद ,कोट, सूट-बूट और कीमती चश्मे में भी नजए आए उतर प्रदेश के हाथरस के हादसे में सैकड़ों भक्तो की जान चली गई बताते हैं सुरज पाल को हिंदू धर्म से नहीं जोड़ सकते इसके भक्त हर धर्म जाति के है इसको लेकर अन्य असली साधु संत बदनाम हो रहे हैं।

1. सुरज पाल सफ़ेद कोट ,पेंट, ,टाई, पहनता है यह जूता पहनकर हि प्रवचन देता रहा है हिंदू धर्म में ऐसा नहीं होता है।

2. सूरज पाल को कितने वेद पुराणों का ज्ञान है? यह किस परंपरा से है? इसके गुरु कौन हैं? ये सत्संग में क्या बताता है इसकी जानकारी भी नही है।

3. सूरज पाल सभाओं में पानी देकर लोगों पर ढोंग करता है इसके अंदर साधु संतों वाले कोई गुण नहीं हैं।

4. इस घटना को लेकर लोगो का मानना है कि इस को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए। यह सब जानकारी आने के। बाद इसे साधु संत और बाबा बताना भी महा पाप है इसके इसी ढोंग के कारण हाथरस में सैकड़ों लोगों की जान चली गई।हाथरस मामले पर जो लोग बार बार सत्संग बोल रहे हैं वे जान लें की सत्संग भगवान का होता है। वो भगवान को नहीं मानता है बाबा के दरबार मे भगवान का नही इंसान का सत्संग चल रहा था एक बार फिर हिन्दू देवी देवताओं को बदनाम करने की साजिश कि गई है बाबा का प्रचलित नाम नारायण साकार विश्व हरी उर्फ भोले बाबा असली नाम सूरज पाल है बाबा के पास लग्जरी कारों का बहुत बड़ा काफिला है और खुद की वर्दीधारी फौज भी है जब भी बाबा कहीं निकलते हैं उसके आसपास प्राइवेट कमांडो और फौज होती है इस लंबी चौड़ी फौज को आश्रम के सेवादार कहा जाता है.

बाबा कि अपनी प्राइवेट आर्मी जिसमें चाक चौबंद व्यवस्था

बाबा हमेशा सफेद कपड़ों में तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों के घेरे में नजर आएंगे, कार्यक्रम में भी सुरक्षा का जिम्मा सेवादारो के ऊपर रहता है सैकड़ों की तादाद में सेवादार उनके ट्रस्ट से जुड़े हैं।बाबा कि अपनी प्राइवेट आर्मी में महिला और पुरुष कमांडो है प्रवचन के दौरान संपूर्ण जिम्मेदारी इसी प्राइवेट आर्मी पर हि रहती हैं बताते है कि पुलिस को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं होती थी बताते हैं कि सीएम योगी से लेकर पूरा प्रशासन बोल चुका है कि कैसे बाबा की आर्मी पुलिस प्रशासन को आयोजन स्थल में एंट्री करने नहीं देती थी

उत्तर प्रदेश के करीब हर शहर में महिला एवं पुरुष सेवादार हैं जो ट्रस्ट से भी जुड़े हैं जानकारी के अनुसार सूरज पाल ने अपनी खुद की नारायणी सेना बनाई थी जिसमें अधिकांश महिला गार्ड भी सामिल है यह सेना आश्रम से लेकर सत्‍संग तक बाबा की सेवा करती हैं इस सेना का अपना एक खास ड्रेस कोड भी है।

पुलिसकर्मी सूरज पाल से ‘चमत्कारी’ बाबा बनने पर सामाजिक सरोकार की भी बड़ी भूमिका रही। सूरज पाल कि नौकरी छूटने के बाद ये सत्संग करने लगा। सत्संग में आने वाली महिलाओं की परेशानी सुनता। धन की जरूरत बताने पर सत्संग में आए श्रद्धालुओं से चंदा करवाते हुए मदद करता। इससे लोगों की श्रद्धा और भक्ति उसके प्रति बढ़ती चली गई। उसके अनुयायियों में मुस्लिम भी हैं।

लोगो ने बताया कि 25 साल पहले आवास पर सूरज पाल सत्संग करने लगा। शुरू में आसपास की महिलाएं आती थीं। चंदा एकत्रित कर मदद करने से घर-घर में पैठ बनती गई। बाद में लोग दूरदराज से भी आने लगे।

लोग बताते हैं कि अब से 30 साल पहले की सूरजपाल एक आम आदमी की तरह रहता था और देखते-देखते कुछ समय बाद बाबा ने अपने एक बहुत बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया

कुटिया बंद रहती है और कभी-कभार साफ-सफाई के लिए अनुयायी खोलते हैं। आस पास के लोगों ने बताया कि हमने कोई चमत्कार नहीं देखा, लेकिन यहां हर मंगलवार को भीड़ अधिक होती हैं।।

सूरज पाल ने गोद ली बेटी को जिंदा करने के लिए किया जाप।

पड़ोसियों का कहना है कि बाबा ने अपने रिश्ते के साले की बेटी स्नेहलता को गोद लिया था। 24 साल पहले उसकी मौत होने पर शव को दो दिन यहां रखा गया।

भक्तों ने नारेबाजी की और बाबा से बेटी को जिंदा करने को कहा। बाद में बाबा शव को मल्ल का चबूतरा लेकर गया, वहां जिंदा करने के लिए जाप करने लगा, हजाराें की भीड़ जुट गई। इस पर बाद पुलिस ने सभी को खदेड़ा दिया

जयपुर हाईवे पर अभु आपुरा स्थित नारायण साकार विश्व हरि चैरिटेबल ट्रस्ट का आश्रम है। इसे बीते साल खरीदा गया था। यहां भी रोजाना भक्त आश्रम के गेट पर मत्था टेकने आते हैं। 2019 में किरावली के गांव नगला भरंगरपुर विधापुर में भोले बाबा का सत्संग 15 दिन तक चला था। इसमें भारी संख्या में लोग सत्संग सुनने आते थे।

भगदड़ में 121 श्रद्धालुओं की हुई मौत

हाथरस के सिकंदराराऊ में हुई भगदड़ में 121 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जिनमें से 106 की पहचान यूपी के 17 जिलों के निवासियों के रूप में हुई है जबकि छह देश के अलग अलग राज्यों के निवासी हैं। बाकी की पहचान के प्रयास जारी हैं।

इन सभी को राज्य-केंद्र सरकार मिलकर मुआवजा देगी। हादसे में 38 लोग घायल हैं, जो खतरे से बाहर हैं। सीएम योगी ने बुधवार को खुद हाथरस के जिला अस्पताल में घायलों का हाल जाना। चश्मदीद घायलों से बात भी की

सीएम के अनुसार हादसे में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ 3 अन्य राज्यों के श्रद्धालु भी शामिल हैं। जिनकी मौत हुई है। अब तक शिनाख्त के अनुसार मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक, हरियाणा के पलवल से एक और फरीदाबाद से तीन, जबकि राजस्थान के डीग से एक की मौत हुई है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के मृतकों में सर्वाधिक 22 मृतक हाथरस से हैं, जबकि आगरा से 17, अलीगढ़ से 15, एटा से 10, कासगंज और मथुरा से 8-8 बदायूं से 6 शाहजहांपुर और बुलंदशहर से 5-5 औरैया और संभल से 2-2, जबकि ललितपुर फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर पीलीभीत लखीमपुर खीरी और उन्नाव से एक-एक श्रद्धालु की मृत्यु हुई है।

कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश से बाहर के छह और उत्तर प्रदेश के 106 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 121 में से अब तक 112 की शिनाख्त हुई है। इन 121 मृतकों में से 113 महिलाएं, 6 बच्चे (5 बच्चे और 1 बच्ची) और दो पुरुष शामिल हैं।

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